गाजियाबाद में परिवहन विभाग की सख्ती: 12 हजार से ज्यादा वाहनों पर 104 करोड़ का बकाया

Ghaziabad transport department notice for commercial vehicle tax dues
गाजियाबाद में व्यावसायिक वाहनों पर बकाया टैक्स को लेकर परिवहन विभाग की कार्रवाई

2016 से लापता व्यावसायिक वाहनों पर टैक्स-पेनल्टी, मालिकों को 10 दिन में जवाब देने का अल्टीमेटम

12 हजार से ज्यादा वाहन बने विभाग के लिए चुनौती

गाजियाबाद जिले में परिवहन विभाग के सामने एक बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। जिले के 12,319 व्यावसायिक वाहनों पर करीब 104 करोड़ रुपये से अधिक का कर और जुर्माना बकाया है। हैरानी की बात यह है कि ये सभी वाहन वर्ष 2016 के बाद से विभाग के संपर्क में नहीं आए हैं। समय के साथ इन पर टैक्स और पेनल्टी जुड़ती गई, जिससे बकाया राशि लगातार बढ़ती चली गई।

फिटनेस और परमिट खत्म, फिर भी जुड़ता रहा टैक्स

परिवहन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, इन वाहनों की फिटनेस और परमिट कई साल पहले समाप्त हो चुके हैं। इसके बावजूद ऑनलाइन सिस्टम में टैक्स की गणना जारी रही। न तो वाहन स्वामियों ने अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लिया और न ही यह सूचना दी कि वाहन अब संचालन में नहीं हैं। इसी लापरवाही की वजह से टैक्स देयता बनी रही।

कई वाहन अब अस्तित्व में ही नहीं

जांच में यह भी सामने आया है कि बड़ी संख्या में वाहन अब सड़कों पर हैं ही नहीं। कुछ वाहन चोरी हो चुके हैं, कुछ दुर्घटनाओं में पूरी तरह नष्ट हो गए, जबकि कई कबाड़ में कट चुके हैं। बावजूद इसके, विभाग को किसी तरह की आधिकारिक सूचना न मिलने के कारण टैक्स रिकॉर्ड चालू रहा।

परिवहन विभाग ने अपनाया सख्त रुख

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए परिवहन विभाग ने अब सख्त कदम उठाने का फैसला किया है। एआरटी प्रशासन अशोक कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि सभी संबंधित वाहन स्वामियों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। वाहन मालिकों को 10 दिन के भीतर कार्यालय में उपस्थित होकर यह बताना होगा कि वाहन किस स्थिति में है।

जवाब नहीं दिया तो होगी भू-राजस्व की तरह वसूली

यदि तय समयसीमा में वाहन स्वामी जवाब नहीं देते हैं, तो विभाग संबंधित मामलों को जिलाधिकारी को भेजेगा। इसके बाद बकाया राशि की वसूली भू-राजस्व की तरह की जाएगी। यानी कुर्की और अन्य कानूनी कार्रवाई भी संभव है।

किन वाहनों पर कितना बकाया

परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक बकाया ट्रक, टैक्सी और बसों पर है। इसके अलावा ऑटो, लोडर और मिनी ट्रक भी सूची में शामिल हैं। कुल मिलाकर यह बकाया विभाग के लिए आर्थिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर बड़ी चुनौती बन चुका है।

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