गाजियाबाद में डिजिटल लेन-देन और ऑनलाइन निवेश के बढ़ते चलन के साथ साइबर अपराध तेजी से बढ़ा है। पुलिस आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2024 से अब तक करीब दो वर्षों में साइबर ठगी के 625 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें ठगों ने कुल 164.08 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की। राहत की बात यह है कि तकनीकी निगरानी, डिजिटल ट्रेसिंग और बैंकिंग सहयोग के जरिए पुलिस ने 34.60 करोड़ रुपये की रिकवरी कर पीड़ितों को कुछ हद तक राहत दी है, लेकिन यह कुल ठगी की राशि का लगभग 21 प्रतिशत ही है।
रिकॉर्ड बताते हैं कि साइबर ठगी के मामलों में सबसे बड़ी हिस्सेदारी शेयर ट्रेडिंग फ्रॉड की रही है। इस श्रेणी में 324 एफआईआर दर्ज हुईं और 114.70 करोड़ रुपये की ठगी सामने आई, जिसमें से 27.05 करोड़ रुपये बरामद किए जा सके। इसके अलावा टेलीग्राम टास्क फ्रॉड के 129 मामलों में 20.34 करोड़ रुपये की ठगी हुई, जबकि डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 40 मामलों में 10.2 करोड़ रुपये का नुकसान दर्ज किया गया।
पुलिस जांच में सामने आए कुछ मामलों ने ठगों के तरीके उजागर किए हैं। वसुंधरा निवासी एक व्यक्ति से मनी लॉन्ड्रिंग का डर दिखाकर डिजिटल अरेस्ट के नाम पर करीब 19.90 लाख रुपये ट्रांसफर कराए गए। वहीं, शेयर ट्रेडिंग के झांसे में एक अन्य पीड़ित से 68.60 लाख रुपये की ठगी हुई, जिसकी जांच में करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन का पता चला। इन मामलों में पुलिस ने आरोपितों की गिरफ्तारी कर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और नकदी बरामद की है।
पुलिस का कहना है कि साइबर ठगी से बचाव के लिए नागरिकों की सतर्कता बेहद जरूरी है। ऑनलाइन निवेश से पहले प्लेटफॉर्म की वैधता जांचें, अनजान लिंक और कॉल से दूर रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत शिकायत करें। जागरूकता ही साइबर अपराध के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है।
