एमसीएक्स पर चांदी 9 फीसदी तक टूटी, सोना भी 1.37 लाख के करीब फिसला
देश का आम बजट पेश होने के ठीक अगले दिन सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार से मिले कमजोर संकेतों के बीच कीमती धातुओं के दाम धड़ाम हो गए। मजबूत डॉलर और मुनाफावसूली के दबाव ने बाजार की चाल को पूरी तरह बदल दिया।
एमसीएक्स पर सोना-चांदी में बड़ी गिरावट
हफ्ते के पहले कारोबारी दिन मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर सोना और चांदी दोनों में तेज गिरावट देखने को मिली। पिछले तीन दिनों से लगातार दबाव में चल रही चांदी अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर से करीब 1.79 लाख रुपये तक टूट चुकी है। वहीं सोना भी फिसलकर लगभग 1.37 लाख रुपये के स्तर पर आ गया है।
कितनी पहुंची सोने की कीमत
एमसीएक्स पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना 5,719 रुपये यानी करीब 4.02 फीसदी गिरकर 1,36,498 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं ऑल इंडिया सराफा एसोसिएशन के मुताबिक, सभी करों सहित सोना 3,500 रुपये सस्ता होकर 1,65,500 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। इससे पहले सोना 1,83,000 रुपये के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच चुका था।
चांदी में आई सबसे बड़ी गिरावट
चांदी की बात करें तो इसमें सबसे तेज गिरावट दर्ज की गई। मार्च डिलीवरी वाली चांदी एमसीएक्स पर 23,908 रुपये सस्ती होकर 2,41,744 रुपये प्रति किलो पर आ गई। ऑल इंडिया सराफा एसोसिएशन के अनुसार, चांदी 72,500 रुपये टूटकर 3,12,000 रुपये प्रति किलो रह गई। यह लगातार दूसरा दिन है जब चांदी में भारी गिरावट देखी गई।
क्यों गिर रहे हैं सोने-चांदी के दाम
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी डॉलर की मजबूती और अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। इसके अलावा बजट में सोना-चांदी के आयात शुल्क में कोई बदलाव न होने से भी बाजार की उम्मीदों को झटका लगा। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर टैक्स राहत का असर भी फिजिकल गोल्ड की मांग पर पड़ रहा है।
प्रमुख शहरों में सोने के भाव
दिल्ली में 24 कैरेट सोना 1,60,720 रुपये और 22 कैरेट सोना 1,47,340 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है। मुंबई, अहमदाबाद, जयपुर और लखनऊ में भी कीमतें लगभग इसी स्तर पर बनी हुई हैं।
निवेशकों और खरीदारों पर असर
जहां ऊंचे दामों पर निवेश करने वालों को नुकसान उठाना पड़ा है, वहीं शादी-ब्याह की तैयारी कर रहे लोगों के लिए यह गिरावट राहत लेकर आई है। फिलहाल बाजार में अस्थिरता बनी हुई है और आगे की चाल अंतरराष्ट्रीय संकेतों पर निर्भर करेगी।
