आगरा में मरीजों के लिए चिंता का विषय बनी दवा की बढ़ी कीमतें
दवाओं पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को 18 और 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किया गया था ताकि मरीजों को सस्ती दवाएं मिल सकें। इसके बाद फार्मा कंपनियों को दवाओं की एमआरपी कम करनी थी, लेकिन हाल ही में सप्लाई की गई नई खेप में एमआरपी 10 प्रतिशत तक बढ़ा दी गई है।
जीएसटी में कटौती और नई एमआरपी का विरोध
आगरा फार्मा एसोसिएशन के मीडिया प्रभारी पुनीत कालरा ने बताया कि उदाहरण के तौर पर:
- यूकोमेल्ट ए – पहले एमआरपी 128.70 रुपये, जीएसटी घटने के बाद नई एमआरपी 120 रुपये होनी चाहिए थी, लेकिन अब एमआरपी 132.35 रुपये है।
- फ्लूटीवेज नेजल स्प्रे – पहले 518 रुपये, जीएसटी के बाद 485.63 रुपये होनी चाहिए थी, अब 534 रुपये।
- सिरप एक्सोरिल फ्लू – पहले 104.50 रुपये, जीएसटी के बाद 98 रुपये होनी चाहिए थी, अब 107.34 रुपये।
- कैप्सूल सोमप्राज डी 40 – पहले 265 रुपये, जीएसटी घटने के बाद 248 रुपये होनी चाहिए थी, अब 280 रुपये।
एनपीपीए की प्रतिक्रिया और जांच
सहायक औषधि आयुक्त अतुल उपाध्याय ने बताया कि राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) में शामिल दवाओं के अधिकतम मूल्य तय हैं। कैंसर, हृदय रोग सहित 3000 से अधिक दवाओं के साल्ट तय हैं, लेकिन अन्य दवाओं की एमआरपी पर कोई नियंत्रण नहीं है। उन्होंने कहा कि जांच की जाएगी और अगर कंपनियां जीएसटी का गलत फायदा उठाकर दवाओं की कीमतें बढ़ा रही हैं, तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
