जेब में 200 रुपये लेकर छोड़ा था घर

Harshvardhan Rane struggle story
संघर्ष के बाद बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाते अभिनेता हर्षवर्धन राणे

संघर्ष, मेहनत और जुनून से हर्षवर्धन राणे बने बॉलीवुड स्टार

नई दिल्ली। बॉलीवुड में चमक-दमक के पीछे छिपे संघर्ष की कहानियां अक्सर लोगों को प्रेरित करती हैं। ऐसी ही एक कहानी है अभिनेता हर्षवर्धन राणे की, जिन्होंने बिना किसी फिल्मी बैकग्राउंड के इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाई। कभी जेब में सिर्फ 200 रुपये लेकर घर छोड़ने वाले हर्षवर्धन आज बॉलीवुड के चर्चित अभिनेताओं में गिने जाते हैं।

बिना गॉडफादर इंडस्ट्री में एंट्री

हर्षवर्धन राणे का सफर आसान नहीं था। न उनके पास पैसा था और न ही कोई बड़ा नाम या गॉडफादर। फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी। शुरुआती दिनों में उन्होंने छोटे-मोटे काम किए और खुद को जिंदा रखने के लिए कड़ी मेहनत की। धीरे-धीरे उनका आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने एक्टिंग को अपना सपना बना लिया।

‘सनम तेरी कसम’ से किया डेब्यू

हर्षवर्धन राणे ने बॉलीवुड में डेब्यू फिल्म ‘सनम तेरी कसम’ से किया। हालांकि रिलीज के समय यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ज्यादा कमाल नहीं दिखा पाई। इसके बावजूद उनकी एक्टिंग को नोटिस किया गया। समय के साथ फिल्म को दोबारा रिलीज किया गया और तब यह दर्शकों के बीच हिट साबित हुई।

री-रिलीज ने बदली किस्मत

फिल्म की री-रिलीज हर्षवर्धन के करियर के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुई। दर्शकों ने उनकी सादगी, इमोशनल एक्टिंग और स्क्रीन प्रेजेंस को खूब पसंद किया। इसके बाद उन्हें इंडस्ट्री में गंभीर अभिनेता के तौर पर देखा जाने लगा।

संजय लीला भंसाली की फिल्म ठुकराई

कम ही लोग जानते हैं कि हर्षवर्धन राणे एक समय संजय लीला भंसाली की फिल्म को भी रिजेक्ट कर चुके हैं। उनका मानना था कि वह वही काम करेंगे, जिससे वह खुद संतुष्ट हों। इस फैसले ने भले ही उनके करियर को धीमा किया हो, लेकिन उनकी सोच और आत्मसम्मान को मजबूत बनाया।

‘एक दीवाने की दीवानीयत’ से मिली पहचान

इसके बाद फिल्म ‘एक दीवाने की दीवानीयत’ में उनके काम को सराहा गया। इस फिल्म ने यह साबित कर दिया कि हर्षवर्धन केवल लुक्स ही नहीं, बल्कि दमदार अभिनय से भी दर्शकों का दिल जीत सकते हैं।

संघर्ष से मिली सफलता

आज हर्षवर्धन राणे उन कलाकारों में शामिल हैं, जो अपने संघर्ष की वजह से युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। उनका सफर बताता है कि अगर जुनून और मेहनत सच्ची हो, तो बिना सिफारिश और पहचान के भी बड़ी मंजिल हासिल की जा सकती है।

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