‘14 प्लस बेस्ट है…’ हनीट्रैप–सेक्सटॉर्शन गैंग का खतरनाक खेल एक्सपोज

Undercover expose of honeytrap and sextortion gang in Delhi
Undercover investigation reveals honeytrap and sextortion network

कॉन्ट्रैक्ट पर फंसाने की साजिश, नाबालिगों का इस्तेमाल और करोड़ों की उगाही

नई दिल्ली में सक्रिय हनीट्रैप और सेक्सटॉर्शन गैंग का चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। अंडरकवर पड़ताल में सामने आया कि गिरोह बाकायदा कॉन्ट्रैक्ट साइन कर टारगेट तय करता है। फिर प्लानिंग के तहत जाल बिछाया जाता है। सबसे खतरनाक बात यह है कि नाबालिग उम्र का नाम लेकर पॉक्सो में फंसाने की रणनीति बनाई जाती है।

‘14 प्लस बेस्ट है’—एजेंट का कबूलनामा

खुफिया कैमरे पर एक महिला एजेंट ने कहा कि 14 साल की उम्र “सबसे सुरक्षित” है क्योंकि सीधे पॉक्सो लगता है। उसने दावा किया कि “टच भी नहीं हुआ तब भी केस पक्का”। 18 साल की उम्र में सहमति का सवाल उठता है, इसलिए कम उम्र को टूल की तरह इस्तेमाल किया जाता है। एजेंट ने बताया कि पहले होटल में मीटिंग होती है। फिर शराब पिलाकर बातचीत और नजदीकियों का वीडियो रिकॉर्ड किया जाता है। इसके बाद ब्लैकमेल शुरू होता है। अगर समझौता न हो तो पुलिस बुलाकर केस दर्ज कराने की धमकी दी जाती है।

दूसरा नेटवर्क भी सक्रिय

महिपालपुर में एक अन्य एजेंट ‘राजू’ से मुलाकात में सेक्सटॉर्शन का खुला दावा किया गया। उसने कहा—“सेक्स कराओ और टॉर्चर करो।” वीडियो बनाकर अगले दिन कॉल किया जाता है। मोटी पार्टी हो तो करोड़ों की डिमांड की जाती है। एजेंट ने होटल और पुलिस “सेटिंग” तक का दावा किया। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

काम करने के तीन तरीके

पहला तरीका—खुद संपर्क कर दोस्ती बढ़ाना, फिर गुप्त रिकॉर्डिंग।
दूसरा तरीका—किसी परिचित के जरिए टारगेट तक पहुंचना।
तीसरा तरीका—वीडियो कॉल के जरिए आपत्तिजनक फुटेज रिकॉर्ड कर ब्लैकमेल। कई मामलों में झूठे रेप केस दर्ज कराए गए। कुछ मामलों में अदालतों ने जांच के बाद साजिश का खुलासा किया।

कानून का दुरुपयोग और चेतावनी

वरिष्ठ अधिवक्ता शैलेंद्र बब्बर का कहना है कि पॉक्सो और धारा 376 का दुरुपयोग भी देखने को मिला है। सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस की अहमियत पर जोर दिया है। झूठे सबूत बनाना गंभीर अपराध है। nरिटायर्ड एसीपी वेद भूषण के मुताबिक, टारगेट अक्सर बदनामी के डर से पैसे दे देता है। इसलिए सतर्क रहना जरूरी है। एकम न्याय फाउंडेशन की संस्थापक दीपिका नारायण भारद्वाज कहती हैं कि कई राज्यों में ऐसे मामलों की संख्या बढ़ी है।

कैसे बचें

अनजान लोगों से निजी मुलाकात में सावधानी रखें।
शराब या दबाव की स्थिति से बचें।
किसी भी धमकी पर तुरंत पुलिस से संपर्क करें।
ऑनलाइन वीडियो कॉल में निजी सामग्री साझा न करें।यह खुलासा दिखाता है कि संगठित गिरोह कैसे कानून और सामाजिक डर का फायदा उठाकर उगाही कर रहे हैं। सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।

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