आईएआरआई का बड़ा पहल: 400 किसानों को उन्नत कृषि प्रशिक्षण

IARI scientists providing agricultural training to farmers in Gangapur City
IARI organizes one-day farmer training and input distribution program for 400 farmers

गंगापुर सिटी में एससीएसपी के तहत एक दिवसीय कार्यक्रम

Indian Agricultural Research Institute (आईएआरआई) ने अनुसूचित जाति उप-योजना के तहत विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। यह कार्यक्रम गंगापुर सिटी के बामनवास तहसील स्थित ग्राम सुकार के अटल सेवा केंद्र में हुआ। शनिवार को आयोजित इस शिविर में करीब 400 किसानों ने भाग लिया। इनमें सुकर, भांवरा और रिवाली ग्राम पंचायतों के किसान शामिल रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों की उत्पादकता बढ़ाना था। साथ ही उनकी आय में वृद्धि करना भी लक्ष्य रहा।

उन्नत किस्मों और तकनीकों पर विशेष जोर

आईएआरआई की वैज्ञानिक डॉ. शशि मीणा के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण संपन्न हुआ।mउन्होंने संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन पर विस्तार से जानकारी दी। साथ ही पूसा द्वारा विकसित नवीनतम तकनीकों के बारे में बताया। उन्होंने किसानों से आधुनिक कृषि पद्धतियां अपनाने का आग्रह किया। अनुवांशिकी विभाग के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. हरिकृष्णा ने उन्नत गेहूं किस्मों पर चर्चा की। उन्होंने प्रभावी फसल चक्र के महत्व को समझाया।
मृदा उर्वरता बनाए रखने के उपाय भी बताए गए। मृदा विज्ञान विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. प्रसेंजीत रे ने मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन पर प्रकाश डाला। उन्होंने उर्वरकों के संतुलित उपयोग की सलाह दी। इसके अलावा मृदा परीक्षण की सही विधि समझाई।
एसएफटीआर सॉइल टेस्टिंग किट के उपयोग का प्रदर्शन भी किया गया।

एकीकृत कृषि प्रणाली से आय बढ़ाने पर जोर

सब्जी विज्ञान विभाग के डॉ. गोगराज सिंह जाट ने सब्जी उत्पादन को आय का सशक्त माध्यम बताया। उन्होंने उन्नत सब्जी खेती तकनीकों की जानकारी दी। कृषि अधिकारी डॉ. सियाराम मीणा ने राज्य सरकार की योजनाओं पर प्रकाश डाला।
सहायक कृषि अधिकारी पिंटू मीणा ने एकीकृत कृषि प्रणाली को अपनाने की सलाह दी।
उन्होंने बकरी पालन और मछली पालन को अतिरिक्त आय का स्रोत बताया। तकनीकी अधिकारी मुकेश मीणा ने किसानों को 25 से 27 फरवरी को नई दिल्ली में आयोजित कृषि मेले में भाग लेने का आह्वान किया।

कृषि आदान का वितरण

कार्यक्रम के अंत में किसानों को कृषि उपकरण वितरित किए गए। फावड़ा और दरांती दी गई। साथ ही मूंग बीज (पूसा विशाल) और बाजरा बीज (प्रजाति-701) बांटे गए। सब्जी फसल किट और प्रशिक्षण किट भी प्रदान की गईं। इस पहल से अनुसूचित जाति किसानों को नई दिशा मिली है। आधुनिक तकनीक और सही मार्गदर्शन से खेती को अधिक लाभकारी बनाने का प्रयास किया गया है।

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