अमेरिकी विज्ञान सलाहकार का बयान, विकासशील देशों को AI अपनाने की चेतावनी
वॉशिंगटन से आए बयान ने भारत की तकनीकी ताकत को वैश्विक मंच पर नई पहचान दी है। अमेरिका के राष्ट्रपति के विज्ञान सलाहकार और Office of Science and Technology Policy के निदेशक माइकल क्रैटसिओस ने कहा है कि भारत एक “तकनीकी महाशक्ति” है। उन्होंने हाल ही में इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में भाग लेने के बाद यह टिप्पणी की।
भारत की इंजीनियरिंग ताकत की सराहना
क्रैटसिओस ने कहा कि भारत हर साल बड़ी संख्या में इंजीनियर तैयार करता है। देश के पास मजबूत घरेलू प्रतिभा है। भारत अच्छे उत्पाद और एप्लिकेशन विकसित कर रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को आगे बढ़ाने की अमेरिकी योजना में भारत की अहम भूमिका होगी।
विकासशील देशों को चेतावनी
हालांकि, बयान में एक चेतावनी भी शामिल थी। उनके मुताबिक विकसित और विकासशील देशों के बीच AI अपनाने की रफ्तार का अंतर तेजी से बढ़ रहा है। यदि विकासशील देश स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा, कृषि और सरकारी सेवाओं में AI को प्राथमिकता नहीं देंगे, तो वे वैश्विक प्रतिस्पर्धा में पीछे छूट सकते हैं।
‘American AI Exports Program’ पर जोर
व्हाइट हाउस ‘American AI Exports Program’ के जरिए सहयोग बढ़ा रहा है। इस कार्यक्रम के तहत बेहतर तकनीक, वित्तीय सहायता और क्रियान्वयन सहयोग की पेशकश की जा रही है। क्रैटसिओस ने कहा कि “वास्तविक AI स्वायत्तता” का अर्थ है – सर्वोत्तम तकनीक का अपने नागरिकों के हित में उपयोग करना और वैश्विक बदलावों के बीच अपनी दिशा खुद तय करना।
मानक और ढांचा भी बड़ी चुनौती
उन्होंने कहा कि AI के अगले चरण में ‘एजेंट्स’ की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। इनके बीच इंटरऑपरेबिलिटी के लिए साझा मानकों की जरूरत है। अमेरिकी संस्था National Institute of Standards and Technology (NIST) इस दिशा में पहल कर रही है। साथ ही, AI इंफ्रास्ट्रक्चर महंगा है। डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर्स और पावर जेनरेशन जैसी बुनियादी सुविधाएं जरूरी हैं।
भारत-अमेरिका साझेदारी और मजबूत
क्रैटसिओस ने भारत को अमेरिका का “मजबूत पार्टनर” बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी बड़ी टेक कंपनियों के भारत में डेटा सेंटर और रिसर्च सेंटर मौजूद हैं। इससे दोनों देशों के बीच AI सहयोग और गहरा हो रहा है। संदेश साफ है। भारत को तकनीकी शक्ति के रूप में स्वीकार किया जा रहा है। लेकिन साथ ही, AI की दौड़ में आगे बने रहने के लिए निरंतर निवेश, मानक निर्धारण और रणनीतिक साझेदारी जरूरी होगी।
