राफेल से भी बड़ी डिफेंस डील, दुश्मन को दिखे बिना समुद्र में आग लगाने वाला भारत का नया ब्रह्मास्त्र

India Germany submarine deal Project 75I
भारत-जर्मनी के बीच Project-75(I) के तहत सबमरीन निर्माण समझौता

भारत-जर्मनी के बीच 8 अरब डॉलर की सबमरीन डील, हिंद-प्रशांत में चीन-पाकिस्तान की बढ़ेगी टेंशन

India Germany Defence Deal: मार्च तक लग सकती है मुहर

भारत और जर्मनी के बीच करीब 8 अरब डॉलर यानी 70,000 से 72,000 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट-75(I) सबमरीन निर्माण समझौते पर मार्च के अंत तक हस्ताक्षर होने की संभावना है। यह सौदा भारत के रक्षा इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी डील साबित हो सकता है। बातचीत अंतिम चरण में है और दोनों देशों के बीच सहमति लगभग बन चुकी है।

हिंद-प्रशांत में बदलता शक्ति संतुलन

चीन और पाकिस्तान की बढ़ती नौसैनिक गतिविधियों ने भारत की समुद्री सुरक्षा चुनौतियां बढ़ा दी हैं। अरब सागर और हिंद महासागर क्षेत्र में चीनी पनडुब्बियों की मौजूदगी चिंता का विषय बनी हुई है। ऐसे में भारतीय नौसेना के लिए अल्ट्रा-मॉडर्न सबमरीन की तैनाती रणनीतिक रूप से बेहद अहम मानी जा रही है।

क्या है Project-75(I)?

प्रोजेक्ट-75 इंडिया के तहत भारतीय नौसेना के लिए छह उन्नत डीजल-इलेक्ट्रिक अटैक सबमरीन बनाई जाएंगी। ये टाइप-214 नेक्स्ट जेनरेशन सबमरीन होंगी, जो फ्यूल-सेल आधारित एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) तकनीक से लैस रहेंगी। इस तकनीक की मदद से पनडुब्बियां कई हफ्तों तक बिना सतह पर आए समुद्र के भीतर रह सकती हैं।

दुश्मन को दिखे बिना हमला करने की ताकत

AIP तकनीक से लैस ये सबमरीन बेहद साइलेंट होंगी। इससे दुश्मन के लिए इन्हें ट्रैक करना लगभग नामुमकिन हो जाएगा। यही वजह है कि इन्हें समुद्र के भीतर छिपा ब्रह्मास्त्र माना जा रहा है। यह भारत की सीक्रेट ऑपरेशन और डेटरेंस कैपेबिलिटी को कई गुना बढ़ा देगा।

मेक इन इंडिया को मिलेगा बड़ा बूस्ट

इस परियोजना में जर्मनी की थाइसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स (TKMS) के साथ मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड साझेदारी करेगी। रणनीतिक साझेदारी मॉडल के तहत 45 से 60 प्रतिशत तक स्वदेशीकरण का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही महत्वपूर्ण टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का भी प्रावधान होगा।

राफेल से भी महंगी डील क्यों?

भारत ने वर्ष 2016 में फ्रांस से 36 राफेल फाइटर जेट करीब 58,000 करोड़ रुपये में खरीदे थे। वहीं जर्मनी के साथ प्रस्तावित सबमरीन डील की कीमत लगभग 72,000 करोड़ रुपये है। इसी वजह से इसे राफेल से भी बड़ी डिफेंस डील माना जा रहा है।

नौसेना की ताकत में होगा बड़ा इजाफा

फिलहाल भारतीय नौसेना के पास रूसी मूल की करीब एक दर्जन पनडुब्बियां और छह स्कॉर्पीन क्लास सबमरीन हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक बदलते सामरिक हालात में भारत को और ज्यादा एडवांस सबमरीन की जरूरत है। Project-75(I) इसी जरूरत को पूरा करेगा।

निष्कर्ष

भारत-जर्मनी के बीच यह सबमरीन करार न केवल नौसेना की मारक क्षमता बढ़ाएगा, बल्कि भारत को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक मजबूत समुद्री शक्ति के रूप में स्थापित करेगा। साथ ही यह रक्षा आत्मनिर्भरता और मेक इन इंडिया मिशन को नई ऊंचाई देगा।

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