दूषित पानी से 50 से ज्यादा मौतों का दावा, प्रशासन पर रिकॉर्ड छिपाने के गंभीर आरोप
राहुल गांधी ने साझा किया पीड़ितों से बातचीत का वीडियो
मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों का मामला एक बार फिर चर्चा में है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रविवार को अपने यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो साझा किया। इस वीडियो में उन्होंने दूषित पानी से प्रभावित परिवारों से बातचीत की। इसके साथ ही प्रशासन पर गंभीर आरोप भी सामने आए।
50 से ज्यादा मौतों का दावा
वीडियो में मौजूद एक सामाजिक कार्यकर्ता ने दावा किया कि दूषित पानी से 50 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। परिजनों का कहना है कि वास्तविक आंकड़े छिपाए जा रहे हैं। कई शवों को रातों-रात गांव भेज दिया गया। इतना ही नहीं, श्मशान घाट के रिकॉर्ड तक गायब कर दिए गए।
22 दिसंबर से शुरू हुई समस्या
पीड़ित परिवारों ने बताया कि पानी की समस्या 22 दिसंबर से शुरू हुई थी। धीरे-धीरे पूरा इलाका बीमारियों की चपेट में आ गया। आधे मोहल्ले को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। बुजुर्गों और बच्चों की हालत सबसे ज्यादा खराब रही।
प्रशासन पर लापरवाही के आरोप
परिजनों का आरोप है कि नगर निगम के अधिकारियों ने समय रहते कार्रवाई नहीं की। नर्मदा लाइन कनेक्शन के नाम पर पैसे लिए गए। इसके बावजूद दूषित पानी की आपूर्ति होती रही। कई परिवारों ने कहा कि शिकायतें महीनों पहले की गई थीं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
मुआवजे पर भी उठे सवाल
पीड़ितों का कहना है कि मुआवजे को लेकर भी गड़बड़ी हुई। अखबारों में 5 से 10 लाख रुपये के मुआवजे की खबरें आईं। लेकिन जमीनी स्तर पर कई परिवारों को सिर्फ 2 लाख रुपये ही मिले। कुछ के पास तो कोई अधिकारी पूछने तक नहीं पहुंचा।
राहुल गांधी का बयान
राहुल गांधी ने कहा कि यह स्मार्ट सिटी मॉडल पर बड़ा सवाल है। उन्होंने कहा कि पीने का पानी ही सुरक्षित नहीं है। उन्होंने पीड़ितों को भरोसा दिलाया कि उनकी लड़ाई को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया जाएगा।
आंकड़ों पर बदलता सरकारी रुख
शुरुआत में प्रशासन ने सिर्फ 4 मौतों की बात कही। फिर यह संख्या 6 और बाद में 15 तक पहुंची। हाईकोर्ट के आदेश पर सरकार ने डेथ ऑडिट रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में 21 मौतों की पुष्टि की गई, जिनमें 15 मौतें दूषित पानी से बताई गईं।
अफसरों का तबादला और प्रमोशन
इस मामले में नगर निगम कमिश्नर दिलीप यादव को पद से हटाया गया। हालांकि 16 दिन के भीतर ही उन्हें प्रमोशन देकर पर्यटन विकास निगम का एमडी बना दिया गया। इससे सरकार की मंशा पर भी सवाल उठ रहे हैं।
पीड़ितों की मांग
पीड़ित परिवार चाहते हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच हो। साथ ही दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि अगर समय रहते कदम उठाए जाते, तो कई जानें बच सकती थीं।
