Iran के हमलों से बदले भू-राजनीतिक समीकरण, Gulf Cooperation Council देशों में उबाल
चौथे हफ्ते में पहुंचा युद्ध, सीजफायर के आसार नहीं
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष अब चौथे सप्ताह में पहुंच चुका है। United States, Israel और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। फिलहाल सीजफायर की कोई संभावना नजर नहीं आ रही है। इस बीच ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अब तक 3000 से ज्यादा मिसाइलें दाग दी हैं, जिससे हालात और ज्यादा गंभीर हो गए हैं।
GCC देशों पर हमलों से बढ़ा शिया-सुन्नी तनाव
ईरान ने United Arab Emirates और Saudi Arabia समेत सुन्नी बहुल खाड़ी देशों को निशाना बनाया है। ये सभी देश Gulf Cooperation Council का हिस्सा हैं। इन हमलों ने क्षेत्र में शिया-सुन्नी तनाव को और गहरा कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे मिडिल ईस्ट की राजनीतिक स्थिरता पर बड़ा असर पड़ा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर असर, तेल अर्थव्यवस्था प्रभावित
ईरान के हमलों का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी देखने को मिल रहा है। Strait of Hormuz जैसे अहम समुद्री मार्ग पर दबाव बढ़ गया है। यह मार्ग दुनिया की तेल सप्लाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में इसकी नाकाबंदी या अस्थिरता से वैश्विक तेल बाजार में भारी उथल-पुथल देखी जा रही है।
लंबी दूरी की मिसाइलों से बढ़ी चिंता
हाल ही में ईरान ने लंबी दूरी की मिसाइलों का इस्तेमाल भी शुरू कर दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, हिंद महासागर में स्थित Diego Garcia में अमेरिकी ठिकाने को निशाना बनाया गया। इससे यह संकेत मिल रहा है कि आने वाले समय में यूरोप तक खतरा बढ़ सकता है।
अगला खतरा MIRV तकनीक से?
रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, ईरान भविष्य में मल्टीपल इंडिपेंडेंट रीएंट्री व्हीकल्स (MIRV) तकनीक का इस्तेमाल कर सकता है। इस तकनीक में एक मिसाइल से कई वॉरहेड्स छोड़े जाते हैं, जिन्हें रोकना बेहद कठिन होता है। यदि ऐसा होता है, तो यह वैश्विक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।
