अमेरिका को दो टूक संदेश, सुप्रीम लीडर पर वार हुआ तो शुरू होगा ऑल-आउट वॉर
मध्य-पूर्व में एक बार फिर हालात तनावपूर्ण होते नजर आ रहे हैं। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने अमेरिका और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने साफ कहा है कि यदि ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई पर किसी भी तरह का हमला किया गया, तो इसे पूरे ईरानी राष्ट्र के खिलाफ पूर्ण युद्ध की घोषणा माना जाएगा। यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच पहले से ही रिश्ते बेहद तल्ख चल रहे हैं।
सोशल मीडिया पर दिया कड़ा संदेश
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बयान जारी करते हुए कहा कि उनके महान नेता पर हमला केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं होगा, बल्कि यह पूरे ईरान को चुनौती देने जैसा होगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ईरान किसी भी सूरत में ऐसे हमले को बर्दाश्त नहीं करेगा और जवाब बेहद कठोर होगा। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है।
अमेरिका पर लगाए गंभीर आरोप
इसके साथ ही पेज़ेश्कियान ने ईरान की आर्थिक समस्याओं के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि वर्षों से लगाए गए अमानवीय प्रतिबंधों और वाशिंगटन की शत्रुतापूर्ण नीतियों ने आम ईरानी नागरिकों की जिंदगी को मुश्किल बना दिया है। उनका कहना था कि अमेरिका की ‘दबाव की राजनीति’ ने ईरान की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाया है, लेकिन इसके बावजूद देश झुका नहीं है।
खामेनेई पहले ही कर चुके हैं ट्रंप पर हमला
इससे पहले ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई भी डोनाल्ड ट्रंप पर तीखा हमला बोल चुके हैं। उन्होंने ट्रंप को “अपराधी” करार देते हुए कहा था कि देश में अशांति और जान-माल के नुकसान के पीछे अमेरिका की भूमिका है। खामेनेई के इस बयान ने दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया।
ट्रंप का पलटवार और नेतृत्व बदलने की बात
जवाब में डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व पर निशाना साधा। ‘पॉलिटिको’ को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि ईरान को दशकों पुराने नेतृत्व से बाहर निकलने की जरूरत है। ट्रंप ने मौजूदा शासन पर दमन, हिंसा और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगाए और दावा किया कि यह सरकार डर के बल पर सत्ता में बनी हुई है।
व्हाइट हाउस वापसी के बाद बढ़ा तनाव
ट्रंप के व्हाइट हाउस में दोबारा लौटने के बाद से अमेरिका-ईरान संबंध लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। ‘मैक्सिमम प्रेशर’ नीति, नए प्रतिबंध और तीखी बयानबाज़ी ने हालात को और विस्फोटक बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दोनों देशों ने संयम नहीं दिखाया, तो क्षेत्र में हालात बेहद गंभीर हो सकते हैं।
