ईरान में पिछले कुछ हफ्तों से हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। देशभर में हिंसक प्रदर्शन और विरोध-प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। सरकारी दमन और सुरक्षा बलों की सख्त कार्रवाई के बीच अब तक कम से कम 5,000 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं हजारों प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया है।
इसके अलावा, इंटरनेट और मीडिया पर कड़ी पाबंदियां लागू कर दी गई हैं। इसके बावजूद, लोगों का गुस्सा सड़कों पर साफ दिखाई दे रहा है। सरकार और सुप्रीम लीडर आयातुल्लाह अली खामनेई ने इस हिंसा के लिए विदेशी ताकतों को जिम्मेदार ठहराया है। वहीं अमेरिका और कई अन्य देशों ने स्थिति पर चिंता जताई है।
अमेरिका को ईरान की सख्त चेतावनी
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अमेरिका को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर सुप्रीम लीडर आयातुल्लाह अली खामनेई पर हमला हुआ, तो इसे पूरे ईरान के खिलाफ युद्ध माना जाएगा। यह बयान उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया। उन्होंने साफ किया कि किसी भी अन्यायपूर्ण हमले का जवाब बेहद कठोर होगा।
अमेरिका और इस्राइल पर गंभीर आरोप
इसके साथ ही ईरान के सर्वोच्च नेता खामनेई ने हिंसा के लिए अमेरिका और इस्राइल को जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना है कि कई उपद्रवियों को विदेशी एजेंसियों ने प्रशिक्षित किया। ईरान ने स्पष्ट किया कि वह किसी भी दबाव में नहीं झुकेगा।
सरकारी टीवी चैनल हुआ हैक
इस बीच ईरान के सरकारी टीवी चैनलों को कुछ समय के लिए हैक कर लिया गया। इस दौरान विरोध प्रदर्शनों के वीडियो और सरकार विरोधी संदेश प्रसारित हुए। इनमें निर्वासित राजकुमार रेजा पहलवी का संदेश भी शामिल था।
रेजा पहलवी का खुला समर्थन
निर्वासित राजकुमार रेजा पहलवी ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया। उन्होंने इसे अधिकार और मुक्ति की लड़ाई बताया। उन्होंने दावा किया कि वह जल्द ईरान लौटेंगे।
इंटरनेट सेवाओं में आंशिक बहाली
8 जनवरी के बाद पूरे देश में इंटरनेट बंद कर दिया गया था। हालांकि अब कुछ इलाकों में सीमित और फिल्टर की गई सेवाएं बहाल की गई हैं। इसके बावजूद लोग खुद को दुनिया से कटा हुआ महसूस कर रहे हैं।
ट्रंप बोले— सभी विकल्प खुले
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान पर कार्रवाई को लेकर सभी विकल्प खुले हैं। हालांकि सैन्य कार्रवाई पर अभी स्पष्ट फैसला नहीं लिया गया है।
अस्थिर शांति का माहौल
तेहरान और अन्य शहरों में कभी-कभी हालात शांत दिखते हैं। लेकिन भारी सुरक्षा बलों की मौजूदगी अस्थिरता को दर्शाती है।
भारतीय छात्रों की आपबीती
ईरान से लौटे भारतीय छात्रों ने हालात को बेहद तनावपूर्ण बताया। इंटरनेट बंद होने से वे पूरी तरह अलग-थलग पड़ गए थे।
आर्थिक विरोध से हिंसक आंदोलन तक
ईरानी अधिकारियों के अनुसार, यह आंदोलन 28 दिसंबर को महंगाई और बेरोजगारी के विरोध में शुरू हुआ था। लेकिन कुछ ही दिनों में यह राजनीतिक और हिंसक रूप ले बैठा।
