5 साल बाद भी अधर में बरौनी–कुड़गांव रोड, आधी भी नहीं बन पाई सड़क
राजस्थान में बुनियादी ढांचे के विकास पर सवाल खड़े करती एक और तस्वीर सामने आई है। जयपुर से करौली जिले को सीधे जोड़ने वाली बरौनी–कुड़गांव सड़क योजना पांच साल बाद भी अधूरी पड़ी है। वर्ष 2021 में 92 करोड़ रुपए की लागत से स्वीकृत इस सड़क का काम 2024 तक पूरा होना था, लेकिन तय समय बीतने के बावजूद सड़क का आधा हिस्सा भी तैयार नहीं हो सका है। इस योजना के तहत टोंक जिले के बरौनी से शुरू होकर चौथ का बरवाड़ा, शिवाड़, सवाई माधोपुर होते हुए करौली जिले के कुड़गांव तक करीब 110 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण किया जाना था। इसका उद्देश्य जयपुर और करौली के बीच सीधी और आसान कनेक्टिविटी देना था, लेकिन जमीनी हालात बिल्कुल उलट नजर आ रहे हैं।
गड्ढे, उड़ती मिट्टी और टूटा रास्ता
अधूरे निर्माण के कारण सड़क कई जगहों पर पूरी तरह उखड़ चुकी है। कच्चे हिस्सों में वाहन चलते ही मिट्टी के गुबार उड़ते हैं, जिससे राहगीरों और स्थानीय लोगों को भारी परेशानी हो रही है। जगह-जगह गड्ढे होने से दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। टोंक जिले के ऐचेर गांव में तो कीचड़ के कारण लोगों का निकलना तक मुश्किल हो गया है। कई स्थानों पर सड़क निर्माण की सामग्री यूं ही पड़ी है, जो हादसों को न्योता दे रही है। ग्रामीणों का कहना है कि अधूरी सड़क ने उनकी रोजमर्रा की आवाजाही को और मुश्किल बना दिया है।
धार्मिक पर्यटन को भी झटका
यह सड़क केवल आम यातायात के लिए ही नहीं, बल्कि धार्मिक पर्यटन के लिहाज से भी बेहद अहम मानी जा रही थी। इस मार्ग से घुश्मेश्वर महादेव मंदिर (शिवाड़), चौथ माता मंदिर (चौथ का बरवाड़ा), त्रिनेत्र गणेश मंदिर (सवाई माधोपुर) और केला देवी मंदिर (करौली) तक श्रद्धालुओं की आवाजाही आसान होनी थी। लेकिन निर्माण अधूरा रहने के कारण श्रद्धालुओं को लंबे और खराब रास्तों से गुजरना पड़ रहा है, जिससे पर्यटन गतिविधियों पर भी असर पड़ा है।
विभाग का तर्क – बजट की कमी
सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) का कहना है कि बजट की कमी सड़क निर्माण में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है। विभाग के अनुसार बजट उपलब्ध होते ही काम में तेजी लाई जाएगी और सवाई माधोपुर जिले में अधिकतर हिस्से जल्द पूरे करने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब 92 करोड़ रुपए पहले ही स्वीकृत हो चुके थे, तो फिर सड़क आज तक अधूरी क्यों है।
