चरागाह भूमि पर भू-माफियाओं का कब्जा, मनोहर थाना में उबाल

Protest against charagah land encroachment in Manohar Thana Jhalawar
मनोहर थाना में चरागाह भूमि पर कब्जे के विरोध में राष्ट्रीय क्षत्रिय महा सेना का ज्ञापन

राष्ट्रीय क्षत्रिय महा सेना ने SDM को सौंपा ज्ञापन, 7 दिन में कार्रवाई नहीं हुई तो बड़े आंदोलन की चेतावनी

झालावाड़। राजस्थान के झालावाड़ जिले के मनोहर थाना क्षेत्र में सरकारी और चरागाह भूमि पर हो रहे अवैध अतिक्रमण को लेकर अब विरोध तेज होता जा रहा है। लंबे समय से जारी इस समस्या के खिलाफ राष्ट्रीय क्षत्रिय महा सेना खुलकर सामने आ गई है। संगठन के प्रदेश महामंत्री जितेंद्र सिंह पंवार ने पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के नाम मनोहर थाना उपखंड अधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए प्रशासन को सीधी चेतावनी दी है।

2020 से शुरू हुआ विवाद

मामले की जड़ें वर्ष 2020 से जुड़ी बताई जा रही हैं। उस समय सरकार ने मनोहर थाना में आईटीआई भवन निर्माण के लिए भूमि आरक्षित की थी। आरोप है कि इसी सरकारी भूमि पर भू-माफियाओं ने अवैध कब्जा कर लिया। इसके बावजूद अब तक प्रशासन द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। यही वजह है कि स्थानीय लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

शिकायतों के बाद भी कार्रवाई शून्य

जितेंद्र सिंह पंवार ने बताया कि इस मुद्दे को लेकर कई बार लिखित शिकायतें दी गईं। इससे पहले अखिल भारतीय गौ रक्षा महासंघ ने भी तहसीलदार और नगरपालिका अधिशासी अधिकारी को ज्ञापन सौंपा था। बावजूद इसके न तो अतिक्रमण हटाया गया और न ही किसी उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन हुआ।

चरागाह भूमि खत्म, सड़कों पर गोवंश

ज्ञापन में इस बात पर खास जोर दिया गया है कि सरकारी भवनों के निर्माण के समय छोड़ी गई अतिरिक्त भूमि को सुरक्षित किया जाए। वर्तमान स्थिति यह है कि चरागाह भूमि पर कब्जे के कारण बेसहारा गोवंश सड़कों पर भटक रहा है। इससे न केवल यातायात बाधित हो रहा है, बल्कि हादसों का खतरा भी बढ़ गया है।

गौशालाओं पर भी उठे सवाल

राष्ट्रीय क्षत्रिय महा सेना ने गौशालाओं के संचालन पर भी सवाल खड़े किए हैं। संगठन का आरोप है कि करोड़ों रुपये का सरकारी अनुदान मिलने के बावजूद कई गौशालाओं में गोवंश दिखाई नहीं देता। फर्जी बिल और वाउचर के जरिए सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।

7 दिन का अल्टीमेटम

संगठन ने प्रशासन को सात दिन का समय दिया है। यदि इस अवधि में अतिक्रमण हटाने और जांच की ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो बड़े स्तर पर आंदोलन और उग्र धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। यह मुद्दा अब सिर्फ जमीन का नहीं, बल्कि सरकारी संपत्ति और गोवंश संरक्षण से जुड़ा बड़ा जनहित का विषय बन चुका है।

Read More :- मेवाड़-वागड़ खेल महोत्सव में आरएनटी स्पोर्ट्स क्लब का परचम