एलडीएफ, यूडीएफ और बीजेपी के बीच त्रिकोणीय मुकाबला, पिनाराई विजयन, वी डी सतीशन और राजीव चंद्रशेखर पर टिकी नजरे
9 अप्रैल को होगा मतदान, सियासी सरगर्मी तेज
केरल में विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. भारत निर्वाचन आयोग ने राज्य की 140 विधानसभा सीटों के लिए मतदान की तारीख का एलान कर दिया है. केरल में 9 अप्रैल को वोटिंग होगी. इसके साथ ही राज्य में चुनावी मुकाबले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. इस बार का चुनाव इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि मौजूदा मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की कोशिश कर रहे हैं. पिछले चुनाव में लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट यानी LDF ने परंपरा को तोड़ते हुए दूसरी बार सरकार बनाई थी. आमतौर पर केरल में हर चुनाव में सत्ता बदलती रही है, लेकिन 2021 में विजयन की अगुवाई में एलडीएफ ने इतिहास रच दिया था. अब देखना यह होगा कि क्या यह सिलसिला जारी रहता है या फिर राज्य की राजनीति में नया बदलाव देखने को मिलेगा.
पिनाराई विजयन के सामने हैट्रिक की चुनौत
केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन 81 वर्ष की उम्र में भी राज्य की राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं. उन्हें एक मजबूत और निर्णायक प्रशासक के तौर पर देखा जाता है. विजयन की राजनीति का लंबा अनुभव और प्रशासनिक फैसले उन्हें एक मजबूत नेता बनाते हैं. उनके नेतृत्व में एलडीएफ सरकार ने कई विकास योजनाओं और प्रशासनिक सुधारों को आगे बढ़ाया है. हालांकि उनके राजनीतिक करियर के दौरान कई विवाद भी सामने आए हैं. इनमें SNC लवलिन केस भी शामिल है, जो लंबे समय से चर्चा में रहा है. इसके बावजूद विजयन की पकड़ पार्टी और सरकार दोनों पर मजबूत मानी जाती है. यही वजह है कि इस चुनाव में उनकी अगुवाई में एलडीएफ फिर से सत्ता में वापसी की उम्मीद कर रहा है.
वी डी सतीशन के नेतृत्व में कांग्रेस की चुनौती
कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट यानी UDF भी इस चुनाव में पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर रही है. विपक्ष के नेता वी डी सतीशन इस बार पार्टी के प्रमुख चेहरे के रूप में सामने आए हैं. सतीशन ने 2001 में विधानसभा में प्रवेश किया था और तब से वह राज्य की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. उनकी पहचान एक स्पष्ट और मुखर नेता के रूप में बनी है. वे अक्सर पब्लिक फाइनेंस, गवर्नेंस, पर्यावरण नीति और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे मुद्दों पर खुलकर बोलते रहे हैं. सतीशन ने कांग्रेस के संगठन को मजबूत करने और पार्टी के भीतर गुटबाजी को कम करने की भी कोशिश की है. अब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह एलडीएफ सरकार के खिलाफ विपक्ष की आवाज को मजबूत चुनावी चुनौती में बदल सकें.
बीजेपी के लिए राजीव चंद्रशेखर बड़ा चेहरा
केरल की राजनीति में बीजेपी भी इस बार बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद कर रही है. पार्टी की ओर से राजीव चंद्रशेखर को प्रमुख चेहरा माना जा रहा है. चंद्रशेखर के सामने सबसे बड़ी चुनौती राज्य में बीजेपी को मजबूत विकल्प के रूप में स्थापित करना है. केरल की राजनीति लंबे समय से एलडीएफ और यूडीएफ के बीच सिमटी रही है. ऐसे में बीजेपी तीसरे विकल्प के रूप में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही है. पिछले लोकसभा चुनाव में एनडीए के प्रदर्शन से पार्टी को उम्मीदें बढ़ी हैं. अब देखना यह होगा कि विधानसभा चुनाव में यह उम्मीद कितनी हकीकत में बदलती है.
