‘द केरल स्टोरी 2’ पर हाईकोर्ट सख्त, सीबीएफसी से पूछा – क्या भावनाएं भड़क सकती हैं?

केरल हाईकोर्ट में ‘द केरल स्टोरी 2’ फिल्म को लेकर सुनवाई की प्रतीकात्मक तस्वीर
केरल हाईकोर्ट में ‘द केरल स्टोरी 2’ के सर्टिफिकेट को लेकर सुनवाई के दौरान उठे सवाल

फिल्म की प्रमाणिकता और सांप्रदायिक प्रभाव को लेकर केरल हाईकोर्ट में सुनवाई तेज

फिल्म The Kerala Story 2 रिलीज से पहले ही विवादों में घिर गई है। सोमवार को Kerala High Court में फिल्म पर रोक लगाने और इसके सर्टिफिकेट को रद्द करने की मांग वाली तीन याचिकाओं पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने Central Board of Film Certification (सीबीएफसी) की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए।

कोर्ट ने जताई सांप्रदायिक तनाव की आशंका

न्यायमूर्ति Bechu Kurian Thomas ने कहा कि जब कोई फिल्म केरल जैसे धर्मनिरपेक्ष राज्य को सांप्रदायिक नजरिए से प्रस्तुत करती है, तब सेंसर बोर्ड की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। उन्होंने टिप्पणी की कि केरल में सामाजिक सद्भाव की परंपरा रही है। ऐसे में यदि किसी घटना को पूरे राज्य से जोड़कर दिखाया जाता है, तो इससे गलत संदेश जा सकता है। अदालत ने यह भी कहा कि इससे भावनाएं भड़क सकती हैं।

‘सच्ची घटनाओं’ के दावे पर उठे सवाल

याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि फिल्म खुद को सच्ची घटनाओं पर आधारित बताती है। इसलिए इसके चित्रण की प्रमाणिकता बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। कोर्ट ने कहा कि यदि फिल्म का नाम ही केरल है, तो राज्य के लोगों की आशंकाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति थॉमस ने स्पष्ट किया कि सामान्य तौर पर अदालतें रचनात्मक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप नहीं करतीं। हालांकि, जब फिल्म वास्तविक घटनाओं से प्रेरित होने का दावा करे, तब जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।

टीजर हटाने पर सहमत हुए निर्माता

फिल्म निर्माताओं की ओर से अधिवक्ता एस. श्रीकुमार ने अदालत को बताया कि वे अंतिम निर्णय तक जारी किए गए टीजर हटाने को तैयार हैं। साथ ही, उन्होंने सुझाव दिया कि न्यायमूर्ति के लिए विशेष स्क्रीनिंग आयोजित की जा सकती है। अब सभी की नजर अदालत के अंतिम फैसले पर टिकी है। यह मामला न केवल एक फिल्म, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन का भी परीक्षण बन गया है।

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