विभाजन के बाद पहली बार ऐतिहासिक आयोजन
पाकिस्तान के Aitchison College परिसर में बने प्राचीन गुरुद्वारा साहिब में 1947 के विभाजन के बाद पहली बार गुरबाणी की स्वर लहरियां गूंजीं। यह आयोजन भावनात्मक और ऐतिहासिक दोनों ही दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा। इस अवसर पर पाकिस्तान के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री Ramesh Singh Arora सहित स्थानीय सिख संगत और कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम में शबद कीर्तन और अरदास का आयोजन किया गया।
140वीं वर्षगांठ पर विशेष शबद कीर्तन
यह विशेष आयोजन कॉलेज की 140वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में रखा गया। कॉलेज की स्थापना 3 नवंबर 1886 को अविभाजित पंजाब के शाही और प्रमुख परिवारों के बच्चों को उच्च शिक्षा देने के उद्देश्य से की गई थी। विभाजन के बाद सिख विद्यार्थियों की अनुपस्थिति के कारण गुरुद्वारा साहिब बंद हो गया था। हालांकि, कॉलेज प्रशासन इसकी नियमित देखरेख करता रहा। अब लगभग 80 वर्षों बाद यहां फिर से धार्मिक स्वर गूंजे, जिससे उपस्थित लोगों की आंखें नम हो गईं।
ऐतिहासिक विरासत और वास्तुकला
कॉलेज परिसर में स्थित इस गुरुद्वारे की डिजाइन प्रसिद्ध सिख वास्तुकार Ram Singh ने तैयार की थी। वे उस समय मेयो स्कूल ऑफ आर्ट्स से जुड़े थे, जिसे आज National College of Arts के नाम से जाना जाता है। इस ऐतिहासिक आयोजन ने न केवल सिख समुदाय बल्कि सांझी विरासत को मानने वाले सभी लोगों के लिए एक भावनात्मक संदेश दिया। यह कार्यक्रम विभाजन के बाद बिछड़ी विरासत को फिर से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
