महाराष्ट्र की सात सीटों पर सियासी संग्राम
Election Commission of India ने 10 राज्यों की 37 रिक्त राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया है। इनमें महाराष्ट्र की सात सीटें शामिल हैं। मतदान 16 मार्च को होगा। नामांकन की अंतिम तिथि 5 मार्च और नाम वापसी की तिथि 9 मार्च तय की गई है। इन चुनावों से महाराष्ट्र की सियासी ताकत साफ नजर आएगी। फिलहाल तस्वीर महायुति गठबंधन के पक्ष में दिख रही है।
महायुति की मजबूत स्थिति, भाजपा को फायदा
महाराष्ट्र विधानसभा में महायुति के पास स्पष्ट बहुमत है। बीजेपी के 131 विधायक हैं। वहीं शिवसेना (शिंदे गुट) के 57 और एनसीपी (अजित पवार) के 40 विधायक हैं। इसके अलावा छोटे दलों और निर्दलियों का भी समर्थन है। राज्यसभा की हर सीट के लिए करीब 37 प्रथम वरीयता मत जरूरी हैं। इस गणित के आधार पर महायुति छह सीटें आसानी से जीत सकती है। इनमें चार सीटें भाजपा के खाते में जा सकती हैं। एक सीट शिवसेना (शिंदे) और एक सीट अजित पवार गुट को मिल सकती है।
विपक्ष की चुनौती और शरद पवार की भूमिका
विपक्षी महाविकास अघाड़ी की स्थिति कमजोर नजर आ रही है। शिवसेना (UBT) के 20, कांग्रेस के 16 और एनसीपी (शरद पवार) के 10 विधायक हैं। कुल मिलाकर एक सीट निकालना संभव है, लेकिन इसके लिए पूरी एकजुटता जरूरी होगी। सबसे बड़ा सवाल Sharad Pawar के भविष्य को लेकर है। वे सेवानिवृत्त होने वाले सदस्यों में शामिल हैं। शिवसेना (UBT) के नेता Sanjay Raut ने उन्हें दोबारा राज्यसभा भेजने का प्रस्ताव दिया है। कांग्रेस भी समर्थन दे सकती है। हालांकि, उनकी उम्र और हालिया राजनीतिक घटनाक्रम को देखते हुए अटकलें हैं कि वे सक्रिय राजनीति से दूरी बना सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो यह महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव होगा।
रामदास आठवले पर भी नजर
Ramdas Athawale की स्थिति भी दिलचस्प है। वे पहले कांग्रेस, एनसीपी और भाजपा के समर्थन से राज्यसभा पहुंचे हैं। पिछली बार भाजपा ने उन्हें मौका दिया था। अब देखना होगा कि पार्टी उन्हें फिर से टिकट देती है या नया चेहरा उतारती है।
चुनाव का व्यापक असर
कुल मिलाकर महाराष्ट्र में राज्यसभा चुनाव महायुति की ताकत का प्रदर्शन साबित हो सकते हैं। 2024 विधानसभा चुनाव में मिली बढ़त की निरंतरता यहां भी दिख सकती है। वहीं विपक्ष के लिए यह चुनाव अस्तित्व की लड़ाई जैसा है। यदि आंतरिक मतभेद उभरते हैं या शरद पवार सक्रिय भूमिका से हटते हैं, तो महाविकास अघाड़ी के लिए एक सीट बचाना भी मुश्किल हो सकता है। स्पष्ट है कि यह चुनाव सिर्फ राज्यसभा प्रतिनिधित्व तय नहीं करेगा, बल्कि आने वाले वर्षों में महाराष्ट्र की राजनीतिक दिशा भी निर्धारित करेगा।
