केंद्रीय एजेंसियों के रडार पर ममता बनर्जी क्यों, CBI-ED से टकराव बना खतरा
CBI-ED से टकराव और सत्ता की राजनीति
देश की राजनीति में जब भी केंद्रीय जांच एजेंसियों का नाम आता है, तो हलचल तेज हो जाती है। खासकर तब, जब मामला किसी मौजूदा मुख्यमंत्री से जुड़ा हो। बीते वर्षों में लालू प्रसाद यादव, अरविंद केजरीवाल और हेमंत सोरेन जैसे बड़े नेताओं को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा है। अब सवाल उठ रहा है कि क्या पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी उसी राह पर हैं। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि ईडी और सीबीआई से लगातार टकराव कहीं उनके लिए भी मुश्किलें न बढ़ा दे।
बंगाल में ममता की मजबूत पकड़
ममता बनर्जी ने 2011 में करीब 35 साल पुराने वामपंथी किले को ध्वस्त कर सत्ता हासिल की थी। इसके बाद उनका सियासी रथ कभी नहीं रुका। 2021 में उन्होंने तीसरी बार बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की सरकार बनाई। अब 2026 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के शीर्ष नेताओं के लगातार दौरे इस बात का संकेत हैं कि मुकाबला कड़ा होने वाला है।
लालू यादव: CBI से उलझे, पर बच न सके
बिहार के मुख्यमंत्री रहते लालू प्रसाद यादव पर पशुपालन घोटाले के आरोप लगे। सीबीआई जांच का उन्होंने और उनके समर्थकों ने जमकर विरोध किया। हालात इतने बिगड़े कि गिरफ्तारी के लिए सेना बुलाने तक की बात हुई। बावजूद इसके, 30 जुलाई 1997 को सीबीआई ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। यह आजादी के बाद पहला मामला था, जब किसी मौजूदा या पूर्व मुख्यमंत्री को केंद्रीय एजेंसी ने गिरफ्तार किया।
अरविंद केजरीवाल: ED नोटिस की अनदेखी पड़ी भारी
दिल्ली शराब नीति मामले में ईडी ने अरविंद केजरीवाल को कई बार नोटिस भेजे। उन्होंने न जवाब दिया और न ही पूछताछ के लिए हाजिर हुए। नतीजतन, 21 मार्च 2024 को ईडी ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। मुख्यमंत्री रहते उनकी गिरफ्तारी ने नया राजनीतिक अध्याय जोड़ दिया। बाद में सीबीआई ने भी तिहाड़ जेल से उन्हें गिरफ्तार किया।
हेमंत सोरेन: रणनीति बदली, लेकिन गिरफ्तारी नहीं टली
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर जमीन घोटाले का आरोप लगा। ईडी के कई नोटिस के बाद भी उन्होंने सहयोग नहीं किया। अंततः 31 जनवरी 2024 को ईडी ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। हालांकि गिरफ्तारी से पहले उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया, लेकिन ईडी से पंगा उन्हें भी भारी पड़ा।
ममता बनर्जी और एजेंसियों का आमना-सामना
ममता बनर्जी पहले भी सीबीआई और अब ईडी से सीधे टकरा चुकी हैं। हाल ही में आई-पैक से जुड़े छापे के दौरान ईडी की कार्रवाई में हस्तक्षेप का आरोप लगा। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। अदालत की टिप्पणियों से संकेत मिलते हैं कि यह मामला गंभीर है। ममता का कहना है कि केंद्र सरकार एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है, लेकिन इतिहास बताता है कि एजेंसियों से टकराव कई मुख्यमंत्रियों को भारी पड़ा है।
