नाबालिग से दुष्कर्म और हत्या मामला: ट्रायल की गंभीर चूक से मौत की सजा रद, हाईकोर्ट ने दिया नया ट्रायल आदेश

Punjab and Haryana High Court verdict in minor rape murder case
नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म और हत्या मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का अहम फैसला।

प्रक्रियात्मक खामियों पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पांच वर्षीय बच्ची के अपहरण, दुष्कर्म और दम घोंटकर हत्या के जघन्य मामले में सत्र अदालत द्वारा सुनाई गई मौत की सजा को रद कर दिया है। अदालत ने कहा कि ट्रायल के दौरान गंभीर प्रक्रियात्मक त्रुटियां हुईं, जिससे अभियुक्त को निष्पक्ष और विधिसम्मत सुनवाई का अवसर नहीं मिल सका।

डेथ रेफरेंस और अपील पर हुई सुनवाई

जस्टिस अनूप चितकारा और जस्टिस सुखविंदर कौर की खंडपीठ ने डेथ रेफरेंस और अभियुक्त की अपील पर एक साथ सुनवाई की। सुनवाई के बाद अदालत ने सत्र अदालत के आदेश को निरस्त करते हुए मामला दोबारा सुनवाई और नए निर्णय के लिए उसी अदालत को वापस भेज दिया।

2020 का मामला, झज्जर जिले से जुड़ा

यह मामला वर्ष 2020 का है और हरियाणा के झज्जर जिले से संबंधित है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह नया ट्रायल नहीं होगा, बल्कि अभियुक्त का बयान कानून के अनुसार सही ढंग से दर्ज किए जाने के चरण से आगे की कार्यवाही की जाएगी।

धारा 313 के बयान में गंभीर चूक

अदालत ने पाया कि अभियुक्त का बयान दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 313 (अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 351) के तहत जिस तरह दर्ज किया गया, वह कानूनन दोषपूर्ण था। कई अहम साक्ष्य अभियुक्त के समक्ष स्पष्टीकरण के लिए रखे ही नहीं गए।

इनमें डीएनए रिपोर्ट, बच्ची के माता-पिता के धारा 164 के तहत बयान और टॉक्सिकोलॉजी रिपोर्ट शामिल थीं। इसके अलावा, अभियुक्त से लंबे और संयुक्त प्रश्न पूछे गए, जिनमें कई तथ्यों को एक साथ जोड़ दिया गया था।

अभियोजन का आरोप क्या था

अभियोजन के अनुसार, बच्ची का अपहरण 20-21 दिसंबर 2020 की रात उसके जन्मदिन के दौरान किया गया। आरोप था कि नशे की हालत में अभियुक्त बच्ची को किराये के मकान से उठाकर अपने घर ले गया, जहां उसके साथ यौन उत्पीड़न किया गया और बाद में दम घोंटकर हत्या कर दी गई।

हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी

हाईकोर्ट ने कहा कि चाहे अपराध कितना ही गंभीर क्यों न हो, न्यायिक प्रक्रिया की पवित्रता से समझौता नहीं किया जा सकता। अदालत ने सत्र अदालत को निर्देश दिए कि वह सभी साक्ष्य अभियुक्त के सामने स्पष्ट और अलग-अलग प्रश्नों के रूप में रखे, बचाव पक्ष को पूरा अवसर दे और फिर कानून के अनुसार नया फैसला सुनाए।

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