‘बदल गया एयरपावर डॉक्ट्रीन’, ब्रह्म चेलानी बोले– ऑपरेशन सिंदूर से मिली सीख
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने असम के मोरान में राष्ट्रीय राजमार्ग पर विमान उतारकर बड़ा रणनीतिक संकेत दिया। यह उत्तर-पूर्व का पहला इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) है। इसे मोरान बाईपास पर तैयार किया गया है। 4.2 किलोमीटर लंबी इस हाईवे स्ट्रिप को भारतीय वायुसेना के सहयोग से विकसित किया गया। यह 74 टन तक के ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और 40 टन तक के फाइटर जेट को संभाल सकती है। प्रधानमंत्री ने Lockheed Martin C-130J Super Hercules से यहां लैंडिंग की। इसके बाद Dassault Rafale और Sukhoi Su-30MKI ने टेकऑफ और फ्लाई-पास्ट किया। इससे ऑपरेशनल तैयारी का प्रदर्शन हुआ।
एयरपावर डॉक्ट्रिन में बदलाव का संकेत
रक्षा विशेषज्ञ Brahma Chellaney ने इसे एयरपावर डॉक्ट्रिन में बड़ा बदलाव बताया। उनके अनुसार, यह असली ऑपरेशनल रिडंडेंसी की दिशा में कदम है। यदि दुश्मन प्रमुख एयरबेस पर हमला करे, तब भी वायुसेना लड़ाई जारी रख सकेगी। उन्होंने कहा कि हवाई युद्ध की शुरुआत अक्सर एयर डिफेंस और एयरफील्ड्स को निष्क्रिय करने से होती है। ऐसे में हाईवे रनवे बैकअप की भूमिका निभाएंगे।
ऑपरेशन सिंदूर से मिली सीख
चेलानी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र किया। उस दौरान राजनीतिक निर्देशों के कारण वायुसेना को सीमित दायरे में कार्रवाई करनी पड़ी। एयर डिफेंस और बेस पर शुरुआती हमला नहीं हुआ। बाद में इसे टैक्टिकल गलती माना गया। तीसरे दिन रणनीति बदली गई। तब स्थिति में सुधार आया। इसी अनुभव के बाद देशभर में 28 इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी विकसित की जा रही हैं। ये बॉर्डर और संवेदनशील इलाकों के पास बनाई जा रही हैं।
मोरान स्ट्रिप का सामरिक महत्व
मोरान स्ट्रिप, चाबुआ एयरफोर्स स्टेशन और डिब्रूगढ़ एयरपोर्ट का बैकअप बन सकती है। हाईवे स्ट्रिप को स्थायी रूप से निष्क्रिय करना कठिन होता है। इन्हें जल्दी ठीक भी किया जा सकता है। साथ ही, C-130J जैसे विमान यहां इन्फैंट्री या हल्के बख्तरबंद वाहन उतार सकते हैं। जरूरत पड़ने पर मोबाइल रडार और कम्युनिकेशन सिस्टम भी सक्रिय किए जा सकते हैं। इसके अलावा असम जैसे आपदा-प्रवण राज्य में यह सुविधा राहत कार्यों में भी मददगार होगी। बाढ़ या प्राकृतिक आपदा की स्थिति में सप्लाई और रेस्क्यू ऑपरेशन तेज किए जा सकेंगे। कुल मिलाकर, मोरान की यह हाईवे रनवे स्ट्रिप भारत की रक्षा रणनीति में रेजिलिएंस और फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
