पटना।
नीतीश कुमार के संभावित राज्यसभा जाने के फैसले पर सियासत गरमा गई है।
पूर्व सांसद डॉ. अरुण कुमार ने इस मुद्दे पर बड़ा सवाल उठाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री पद छोड़ना राज्य के हित में नहीं होगा।
मुख्यमंत्री पद छोड़ना सही नहीं
इंटरहेडिंग के बाद पूरे क्रम में देखें तो, डॉ. अरुण कुमार ने स्पष्ट कहा कि अगर नीतीश कुमार को राज्यसभा जाना ही है, तो उन्हें मुख्यमंत्री पद नहीं छोड़ना चाहिए।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि यदि बदलाव जरूरी हो, तो उनके बेटे निशांत कुमार को मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है।
‘चार महीने में ऐसा क्या बदल गया?’
इंटरहेडिंग के बाद पूरे क्रम में समझें तो, उन्होंने सवाल उठाया कि एनडीए ने एक साल पहले ही नीतीश कुमार के नेतृत्व में पांच साल के कार्यकाल के लिए जनता से वोट मांगा था। ऐसे में यह समझ से परे है कि केवल चार महीने में ऐसा क्या बदल गया कि राज्यसभा जाने की चर्चा शुरू हो गई।
फैसले की पटकथा पर उठाए सवाल
डॉ. कुमार ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि इस पूरे घटनाक्रम की “पटकथा लिखने वालों” ने ठीक नहीं किया।
उन्होंने इसे “अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसा” कदम बताया।
मिलने की कोशिश भी रही नाकाम
उन्होंने बताया कि होली के दिन जब इस फैसले की चर्चा सामने आई, तब उन्होंने नीतीश कुमार से मिलने की कोशिश की, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी।
विचारधारा बचाने की बात
इंटरहेडिंग के बाद पूरे क्रम में देखें तो, डॉ. अरुण कुमार ने कहा कि जयप्रकाश नारायण, राम मनोहर लोहिया और कर्पूरी ठाकुर की विचारधारा को बचाने के लिए नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री बने रहना जरूरी है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने समाज के सभी वर्गों के विकास के लिए काम किया है।
पुराने मतभेदों पर भी बोले
इंटरहेडिंग के बाद पूरे क्रम में समझें तो, डॉ. अरुण कुमार ने अपने और नीतीश कुमार के बीच पुराने मतभेदों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों के कारण उनके बीच दूरी बढ़ी थी, लेकिन अब वह फिर से पार्टी के साथ हैं और उसकी चिंता कर रहे हैं।
समता पार्टी के दौर को किया याद
उन्होंने बताया कि जब समता पार्टी का गठन हुआ था, तब उनके पास राष्ट्रीय जनता दल और समता पार्टी में शामिल होने का विकल्प था। उन्होंने समता पार्टी इसलिए चुनी क्योंकि उन्हें जॉर्ज फर्नांडिस और नीतीश कुमार में राज्य के विकास के प्रति प्रतिबद्धता दिखाई दी।
