600 ट्रक, 400 बसें और 7 घंटे… पिता ने ढूंढ निकाला स्कूल बस में बंद अपना बच्चा

स्कूल बस में बंद मिला डरा सहमा बच्चा
7 घंटे तक बंद बस में रहा यूकेजी छात्र, पिता ने यार्ड में ढूंढ निकाला।

सेक्टर-44 स्थित स्कूल में बड़ी लापरवाही

Noida के सेक्टर-44 स्थित Amity International School में पढ़ने वाले यूकेजी छात्र के साथ हुई घटना ने हर माता-पिता को झकझोर दिया। एक सामान्य सुबह की तरह बच्चा स्कूल बस में बैठा। उस दिन उसकी बड़ी बहन स्कूल नहीं गई थी। बस में बैठते ही वह सो गया।

नींद खुली तो चारों तरफ सन्नाटा

रास्ते में बस खराब हो गई। बच्चों को दूसरी बस में शिफ्ट कर दिया गया। लेकिन सो रहे बच्चे पर किसी का ध्यान नहीं गया। स्कूल पहुंचने के बाद बाकी बच्चों को उतार दिया गया। उसे किसी ने नहीं देखा। बस को करीब 25 किलोमीटर दूर सेक्टर-81 के एक बड़े यार्ड में खड़ा कर दिया गया। वहां 600 ट्रक और 400 बसें खड़ी थीं। जब बच्चे की नींद खुली, तो वह खुद को अकेला पाया। न दोस्त। न टीचर। न कोई आवाज। उसने दरवाजा पीटा। रोया। मदद के लिए चीखा। लेकिन एसी बस के लॉक गेट्स के पीछे उसकी आवाज दब गई।

घर पर बढ़ी बेचैनी

छुट्टी के बाद भी जब बच्चा घर नहीं पहुंचा, तो परिवार की चिंता बढ़ गई। स्कूल से संपर्क किया गया। लेकिन सीसीटीवी निगरानी और बस लोकेशन की लापरवाही के कारण करीब ढाई घंटे तलाश में निकल गए। आखिरकार पिता खुद सेक्टर-81 के यार्ड पहुंचे। 600 ट्रक और 400 बसों के बीच खोजबीन शुरू हुई। किसी तरह एसी बस का दरवाजा खोला गया। अंदर उनका मासूम बेटा डरा-सहमा बैठा था। चेहरा आंसुओं से भीगा हुआ। सांस लेने में तकलीफ हो रही थी।

लापरवाही की कई परतें

• बस पहुंचने के बाद अटेंडेंस रजिस्टर का मिलान नहीं किया गया।
• सीसीटीवी मॉनिटरिंग में ढिलाई बरती गई।
• बस स्टाफ ने बस खाली होने की जांच नहीं की।
• करीब 6 से 7 घंटे तक बच्चा बस में बंद रहा।

स्कूल की कार्रवाई

स्कूल प्रबंधन ने संबंधित ट्रांसपोर्टर की सेवा समाप्त कर दी है। बस स्टाफ को सस्पेंड किया गया है। प्रवक्ता सविता मेहता ने कमियों को दूर करने की बात कही। वहीं डीआईओएस राजेश कुमार सिंह ने स्कूल का निरीक्षण करने की बात कही है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी बना हुआ है— क्या वह बच्चा दोबारा स्कूल बस में बैठते समय खुद को सुरक्षित महसूस कर पाएगा?

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