जिस ‘टेक सिटी’ ने करियर संवारा, उसी की अंधेरी सड़कों ने बुझा दिया घर का चिराग
हाई-टेक शहर में विकास के दावों पर सवाल
दिल्ली से सटे हाई-टेक शहर नोएडा में एक दर्दनाक हादसे ने सिस्टम की लापरवाही को बेनकाब कर दिया है। सेक्टर-150 में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत ने यह दिखा दिया कि चमचमाती इमारतों और स्मार्ट सिटी के दावों के पीछे जमीनी हकीकत कितनी भयावह है। यह महज एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक असंवेदनशीलता की जीती-जागती मिसाल बन चुका है।
कैसे हुआ हादसा
शुक्रवार रात कोहरे के बीच सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कार सेक्टर-150 के पास एक निर्माणाधीन मॉल के पानी से भरे बेसमेंट में जा गिरी। यह बेसमेंट किसी खाई की तरह था, जो सड़क से करीब 60 फीट अंदर था। हादसे के वक्त युवराज के पिता राजकुमार मेहता भी मौके पर मौजूद थे और अपनी आंखों के सामने बेटे को मौत से जूझते देख रहे थे।
आखिरी वक्त की दर्दनाक पुकार
युवराज कार की छत पर लेटकर मोबाइल की टॉर्च जलाकर मदद मांग रहा था। वह लगातार चिल्ला रहा था, “पापा बचा लो… मैं डूब रहा हूं।” पिता ने तुरंत डायल-112 पर कॉल किया। हालांकि, मदद के नाम पर सिर्फ इंतजार और लापरवाही ही मिली।
80 बचावकर्मी, लेकिन कोई नहीं उतरा
रात 12:45 बजे पुलिस और दमकल विभाग मौके पर पहुंचा। इसके बाद SDRF और NDRF की टीमें भी आईं। करीब 80 बचावकर्मी मौजूद थे। इसके बावजूद किसी ने पानी में उतरने की हिम्मत नहीं दिखाई। “पानी ठंडा है” और “अंदर सरिया हो सकता है” जैसे बहाने बनते रहे।
समय पर मदद मिलती तो बच सकती थी जान
एक स्थानीय डिलीवरी बॉय ने साहस दिखाते हुए रस्सी बांधकर पानी में उतरने की कोशिश की। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में युवराज के फेफड़ों में 200 मिलीलीटर पानी पाया गया। डॉक्टरों के अनुसार, समय रहते रेस्क्यू होता तो युवराज की जान बच सकती थी।
ग्रेटर नोएडा शिफ्ट करने का फैसला
युवराज पहले गाजियाबाद में रहते थे, जहां से मेट्रो के जरिए ऑफिस आना-जाना आसान था। नवंबर 2024 में उन्होंने ग्रेटर नोएडा शिफ्ट होने का फैसला लिया। पब्लिक ट्रांसपोर्ट की कमी के कारण उन्हें कार पर निर्भर रहना पड़ा। यही फैसला उनकी जिंदगी का आखिरी सफर बन गया।
10 साल से अटकी फाइलें बनीं मौत की वजह
जांच में सामने आया कि जिस जगह हादसा हुआ, वहां 2015 से एक सरकारी प्रोजेक्ट अटका हुआ था। सिंचाई विभाग और नोएडा अथॉरिटी के बीच तालमेल की कमी ने इस इलाके को मौत का जाल बना दिया।
सीएम योगी का सख्त एक्शन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए नोएडा अथॉरिटी के CEO को हटा दिया है। जूनियर इंजीनियर को सस्पेंड कर दिया गया है। साथ ही, तीन सदस्यीय SIT गठित की गई है, जो पूरे मामले की जांच करेगी।
अब भी कई सवाल बाकी
चार दिन बीत जाने के बाद भी कार और मोबाइल बरामद नहीं हो पाए हैं। सवाल यह है कि क्या एक होनहार इंजीनियर की जान की कीमत सिर्फ कुछ निलंबन तक सीमित रह जाएगी।
