मुखिया हो तो ऐसी! गांव से दिल्ली तक महिला सशक्तिकरण की मिसाल

Pandu Panchayat Mukhia Priyanka Singh Women Empowerment
पांडू पंचायत की मुखिया प्रियंका सिंह, गणतंत्र दिवस समारोह की विशेष अतिथि

पर्दा प्रथा खत्म कर बनीं बदलाव की पहचान

झारखंड के पलामू जिले की पांडू पंचायत की युवा मुखिया प्रियंका सिंह आज पूरे देश के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं & उनका नाम राष्ट्रीय मंच पर गूंज रहा है।
26 जनवरी को दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह में उन्हें विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है।
यह आमंत्रण भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय की ओर से मिला है।

प्रियंका सिंह झारखंड राज्य पंचायती राज विभाग का प्रतिनिधित्व करते हुए इस ऐतिहासिक समारोह में शामिल होंगी।
यह सम्मान उनके साहसिक फैसलों और जमीनी बदलाव की पहचान है।

महिला सशक्त पंचायत बनाने का लिया संकल्प

प्रियंका सिंह ने कार्यभार संभालते ही पांडू पंचायत को महिला-फ्रेंडली बनाने का बीड़ा उठाया।
उन्होंने सबसे पहले पंचायत से पर्दा प्रथा को खत्म करने की पहल की।
धीरे-धीरे महिलाएं घरों से निकलकर विकास की मुख्यधारा से जुड़ने लगीं।

मनरेगा से स्वरोजगार तक महिलाओं की भागीदारी

मनरेगा के तहत पंचायत में 60 से 70 प्रतिशत महिलाओं को रोजगार से जोड़ा गया।
अब पंचायत की 70 प्रतिशत महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन चुकी हैं।
शत-प्रतिशत बच्चियां स्कूल जाने लगी हैं।

दीदी बाड़ी योजना के माध्यम से महिलाएं सड़क निर्माण और विकास कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
जेएसएलपीएस के अंतर्गत 13 महिला स्वयं सहायता समूह बनाए गए।
इन समूहों के जरिए महिलाओं को जागरूकता और स्वरोजगार से जोड़ा गया।

डिजिटल पंचायत और बुनियादी विकास

पारदर्शिता के लिए पंचायत में ऑनलाइन व्यवस्था लागू की गई।
जल-नल योजना के तहत हर घर तक पानी पहुंचाया गया।
शिवाला टोला सहित वर्षों से उपेक्षित गांवों में सड़कें बनीं।
अब तक पंचायत में करीब 1700 आवासों का निर्माण हो चुका है।

राष्ट्रीय स्तर पर मिला सम्मान

महिला सशक्त पंचायत के रूप में उत्कृष्ट कार्यों के लिए पांडू पंचायत को 2017 में सम्मान मिला।
दिल्ली में महिला सशक्त पंचायत बनाने के लिए प्रियंका सिंह को विशेष अवॉर्ड भी दिया गया।

कर्तव्य पथ पहुंचना सपने जैसा

दिल्ली आमंत्रण को लेकर प्रियंका सिंह भावुक हैं।
उन्होंने कहा कि बचपन में दादा-दादी टीवी पर गणतंत्र दिवस समारोह दिखाया करते थे।
आज उसी कर्तव्य पथ पर बैठकर समारोह देखना सपने के सच होने जैसा है।

यह कहानी सिर्फ एक मुखिया की नहीं & ग्रामीण महिलाओं के आत्मविश्वास और सशक्त भारत की तस्वीर है।

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