PM मोदी ने रखा आत्मनिर्भर भारत का विजन
नई दिल्ली में आयोजित ‘राइजिंग भारत सम्मेलन’ में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आत्मनिर्भर भारत पर विस्तार से बात की।
उन्होंने कहा कि पिछले 11–12 वर्षों में भारत ने अपनी “अंतर्निहित शक्ति” को पहचाना है।पीएम ने कहा कि अगर देश 2014 से पहले वाली निराशा में होता, तो विकसित देश भारत के साथ व्यापार समझौते करने के लिए आगे नहीं आते।
उनके मुताबिक, आज भारत का बढ़ता आत्मविश्वास ही ट्रेड डील्स में उत्साह की वजह है।
‘गुलामी की मानसिकता से बाहर निकला भारत’
प्रधानमंत्री ने कहा कि सदियों की गुलामी ने देश के आत्मविश्वास को कमजोर किया। विदेशी विचारधाराओं ने यह भावना पैदा की कि भारत केवल अनुयायी है। उन्होंने शास्त्रों का उल्लेख करते हुए कहा—“तत् त्वम असि”, यानी शक्ति हमारे भीतर ही है।
उन्होंने कहा कि जब भावना हीन होती है, तो उपलब्धियां भी सीमित रह जाती हैं।
मैन्युफैक्चरिंग और मेक इन इंडिया पर जोर
पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने मैन्युफैक्चरिंग पर नया फोकस किया है।‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा दिया गया। बैंकिंग सिस्टम को मजबूत किया गया। डबल डिजिट महंगाई को नियंत्रित किया गया। उन्होंने कहा कि भारत अब दुनिया का ग्रोथ इंजन बन रहा है। इसी कारण विकसित देश भारत से व्यापार समझौते के लिए आगे आ रहे हैं।
डिजिटल इंडिया बना वैश्विक मॉडल
प्रधानमंत्री ने जनधन, आधार और मोबाइल (JAM) की ताकत का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत ने डिजिटल पेमेंट में ग्लोबल लीडरशिप हासिल की है। सरकारी योजनाओं में लीकेज को खत्म करने के लिए डीबीटी के जरिए 24 लाख करोड़ रुपये सीधे लाभार्थियों को भेजे गए। भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर आज दुनिया के लिए उदाहरण बन चुका है।
‘6 लाख करोड़ विदेशी जहाजों को क्यों?’
पीएम मोदी ने सवाल उठाया कि भारत विदेशी जहाजों पर 6 लाख करोड़ रुपये क्यों खर्च करे। उन्होंने कहा कि देश को शिपबिल्डिंग और मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भर बनना होगा। यही आत्मनिर्भर भारत का असली मास्टरप्लान है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जब किसी राष्ट्र की छिपी शक्ति जागती है, तो वह नई ऊंचाइयों को छूता है। उन्होंने देशवासियों से आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की अपील की।
Read More :- काशीपुर में आचार्य प्रमोद कृष्णम का बयान, राहुल–अखिलेश पर साधा निशाना
