पूर्णिया में आग लगने से 16 गायों की मौत

Purnia village fire cattle death
पूर्णिया के टीकापटी गांव में आग लगने के बाद जले हुए मवेशी बासा का दृश्य

झुलसे पशुओं के लिए रातभर तड़पते रहे किसान, फोन के बावजूद नहीं पहुंचे सरकारी डॉक्टर

पूर्णिया जिले के टीकापटी थाना क्षेत्र से एक बेहद दर्दनाक और लापरवाही को उजागर करने वाली घटना सामने आई है। मोरसंडा बहियार स्थित टीकापटी गांव में बीती देर रात मवेशियों के बासा में अचानक आग लग गई। इस हादसे में 16 गायों की मौके पर ही झुलसकर मौत हो गई, जबकि करीब आधा दर्जन पशु गंभीर रूप से झुलस गए। घटना के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है और मवेशी पालकों में जबरदस्त आक्रोश देखा जा रहा है।

रात के सन्नाटे में लगी आग

मवेशी पालकों ने बताया कि रोज की तरह वे शाम को पशुओं को चारा खिलाकर ठंड के कारण बासा में बांधकर अपने गांव चले गए थे, जो घटनास्थल से लगभग तीन किलोमीटर दूर है। रात करीब दो बजे गांव के ही नन्हकी यादव साइकिल से दौड़ते हुए गांव पहुंचे और आग लगने की सूचना दी। जब तक लोग मौके पर पहुंचे, तब तक आग ने विकराल रूप ले लिया था और पूरा बासा जलकर खाक हो चुका था।

16 पशुओं ने मौके पर तोड़ा दम

ग्रामीणों के अनुसार, आग इतनी तेज थी कि पशुओं को बाहर निकालने का मौका तक नहीं मिल सका। 16 गायें बुरी तरह झुलसकर दम तोड़ चुकी थीं, जबकि छह अन्य पशु गंभीर हालत में तड़प रहे थे। यह दृश्य इतना भयावह था कि मौके पर मौजूद लोगों की आंखों से आंसू नहीं थम रहे थे।

फोन करते रहे किसान, नहीं आई मदद

घटना के बाद मवेशी पालक लगातार मवेशी अस्पताल के चिकित्सा प्रभारी डॉक्टर संतोष कुमार को फोन करते रहे, लेकिन वे मौके पर नहीं पहुंचे। इतना ही नहीं, किसान एंबुलेंस के लिए टोल फ्री नंबर 1962 पर भी दर्जनों बार कॉल किया गया, पर वहां से भी कोई सहायता नहीं मिल सकी। पूरी रात पशु बिना इलाज के दर्द से कराहते रहे।

सुबह पहुंचा एनजीओ कर्मी

सुबह करीब साढ़े आठ बजे एक एनजीओ के कर्मी, जो पशुओं के गर्भाधान कार्य से जुड़े हैं, मौके पर पहुंचे और अपने सीमित ज्ञान के अनुसार झुलसे पशुओं का इलाज शुरू किया। हालांकि तब तक कई पशुओं की हालत बेहद नाजुक हो चुकी थी।

प्रशासन मौके पर, लोगों में आक्रोश

घटना की सूचना मिलते ही थानाध्यक्ष अभिषेक कुमार, सीओ शिवानी सुरभि, मुखिया शांति देवी और पूर्व मुखिया अवधेश सरस्वती मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। बावजूद इसके, सरकारी पशु चिकित्सकों की गैरमौजूदगी को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।

जांच और कार्रवाई की मांग

मवेशी पालकों रूदल यादव, रामानंद यादव और पंकज यादव ने प्रशासन से मांग की है कि दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए और उन्हें मुआवजा दिया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय पर इलाज मिल जाता, तो कई पशुओं की जान बचाई जा सकती थी।

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