पुराने बयानों ने पकड़ी रफ्तार, दो राज्यों में मानहानि मामलों की सुनवाई
नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पिछले दो दिनों से अदालतों में पेशी को लेकर सुर्खियों में हैं। शुक्रवार को वह उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर स्थित MP/MLA कोर्ट पहुंचे। वहीं शनिवार को महाराष्ट्र के भिवंडी कोर्ट में पेश हुए। दोनों मामले उनके पुराने राजनीतिक बयानों से जुड़े हैं। हालांकि ये केस नए नहीं हैं। लेकिन अब इनकी सुनवाई तेज हो गई है। इसलिए उन्हें व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना पड़ा।
सुलतानपुर केस क्या है?
सुलतानपुर की MP/MLA कोर्ट में मामला साल 2018 का है। कर्नाटक विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह पर कथित टिप्पणी की थी। इस बयान को भाजपा नेता विजय मिश्रा ने मानहानिकारक बताया। इसके बाद उनके खिलाफ केस दर्ज कराया गया। कोर्ट ने कई बार पेशी के लिए कहा। अंततः राहुल गांधी को खुद कोर्ट में उपस्थित होना पड़ा। करीब 20 मिनट सुनवाई चली। राहुल गांधी ने आरोपों से इनकार किया। उन्होंने इसे राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित बताया। अब अगली सुनवाई 9 मार्च को तय की गई है।
भिवंडी कोर्ट का मामला क्या है?
दूसरा मामला साल 2014 का है। लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर बयान दिया था। इसके बाद RSS कार्यकर्ता राजेश कुंटे ने मानहानि की शिकायत दर्ज कराई। यह केस महाराष्ट्र के भिवंडी कोर्ट में लंबित है। हाल ही में उनके पुराने जमानतदार के निधन के बाद नया जमानतदार पेश करना जरूरी हो गया था। इसी कानूनी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए राहुल गांधी कोर्ट पहुंचे। इस दौरान उनके काफिले का विरोध भी हुआ। भाजपा कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाए। इससे राजनीतिक माहौल और गरमा गया।
क्या ये मामले नए हैं?
नहीं। एक मामला 2014 का है। दूसरा 2018 का। लेकिन अब अदालत में सुनवाई की प्रक्रिया तेज हुई है। इसलिए लगातार पेशी हो रही है।
राजनीतिक असर भी दिखा
इन पेशियों का राजनीतिक असर साफ नजर आ रहा है। विपक्ष इसे राजनीतिक दबाव बता रहा है। वहीं सत्तापक्ष इसे सामान्य कानूनी प्रक्रिया कह रहा है।
आगे क्या होगा?
आने वाली तारीखों पर राहुल गांधी या उनके वकील अदालत में जवाब देंगे। यदि अदालत आरोप तय करती है तो मामला ट्रायल में जाएगा। फिलहाल दोनों केस न्यायिक प्रक्रिया के तहत चल रहे हैं। राहुल गांधी के ये कोर्ट दौरे एक बार फिर यह सवाल उठा रहे हैं कि चुनावी मंचों पर दिए गए बयान सालों बाद कानूनी चुनौती बन सकते हैं। आने वाले दिनों में इन मामलों की सुनवाई राजनीतिक और कानूनी दोनों नजरियों से अहम मानी जा रही है।
