राहुल गांधी ने वित्त मंत्री को लिखा पत्र, ECHS बजट और दिव्यांगता पेंशन पर उठाए सवाल

राहुल गांधी द्वारा वित्त मंत्री को लिखा गया पत्र
राहुल गांधी ने ECHS बजट और दिव्यांगता पेंशन पर आयकर हटाने की मांग उठाई।

पूर्व सैनिकों के मुद्दों पर हस्तक्षेप की मांग

लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने केंद्रीय वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman को पत्र लिखा है। 25 फरवरी 2026 को लिखे इस पत्र में उन्होंने पूर्व सैनिकों से जुड़े दो अहम मुद्दों पर हस्तक्षेप की मांग की। पत्र की एक प्रति रक्षा मंत्री Rajnath Singh को भी भेजी गई है।

ECHS के लिए पर्याप्त बजट की मांग

राहुल गांधी ने एक्स-सर्विसमेन कंट्रीब्यूटरी हेल्थ स्कीम (ECHS) के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध कराने की अपील की। उन्होंने लिखा कि योजना गंभीर वित्तीय संकट से गुजर रही है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि 12 हजार करोड़ रुपये से अधिक के मेडिकल बिल लंबित हैं। बजट आवंटन आवश्यकता से लगभग 30% कम बताया गया है। भुगतान न होने के कारण कई निजी अस्पताल योजना से बाहर हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिकों को इलाज के लिए अपनी जेब से खर्च करना पड़ रहा है।
कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज में देरी हो रही है।

दिव्यांगता पेंशन पर नए आयकर नियमों का विरोध

1 अप्रैल 2026 से लागू नए आयकर प्रावधानों पर भी राहुल ने आपत्ति जताई। नए नियमों के तहत केवल वही दिव्यांगता पेंशन कर-मुक्त रहेगी, जिन्हें चोट या दिव्यांगता के कारण सेवा से ‘इनवैलिडेड आउट’ किया गया है। जो सैनिक दिव्यांगता के बावजूद सेवा में बने रहे और नियमित सेवानिवृत्ति तक पहुंचे, उनकी ‘Impairment Relief’ अब आयकर के दायरे में आएगी। पहले 1922 से चली आ रही व्यवस्था के तहत सेवा-संबंधित सभी प्रकार की दिव्यांगता पेंशन पूरी तरह कर-मुक्त थी।

कांग्रेस का विरोध

18 फरवरी को कांग्रेस ने कहा था कि यदि सरकार ने फैसला वापस नहीं लिया तो पूर्व सैनिकों के साथ बड़ा विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। राहुल गांधी इससे पहले भी रक्षा मामलों की संसदीय स्थायी समिति में यह मुद्दा उठा चुके हैं। उन्होंने कहा था कि कई निजी अस्पताल बकाया भुगतान का हवाला देकर पूर्व सैनिकों का इलाज करने से मना कर देते हैं।

संसदीय स्थायी समिति की भूमिका

भारत सरकार में कुल 24 डिपार्टमेंटल पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी हैं। इनमें 16 लोकसभा और 8 राज्यसभा के अंतर्गत संचालित होती हैं। हर कमेटी में 31 सदस्य होते हैं। इनका मुख्य कार्य संबंधित विभागों की नीतियों की समीक्षा, सुझाव देना और मसौदा तैयार करना है। फिलहाल इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की ओर से औपचारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।

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