राजस्थान में वोटर लिस्ट पर सियासी घमासान, बीएलओ के वीडियो से बढ़ा विवाद

Rajasthan BLO video voter list controversy
बीएलओ के वायरल वीडियो के बाद राजस्थान में वोटर लिस्ट को लेकर सियासी विवाद

मतदाताओं के नाम हटाने के आरोपों पर कांग्रेस-भाजपा आमने-सामने, SIR प्रक्रिया पर उठे सवाल

राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर मतदाता सूची को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। जयपुर के हवामहल विधानसभा क्षेत्र से सामने आए एक बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) के वायरल वीडियो ने सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी कांग्रेस को आमने-सामने ला खड़ा किया है। यह मामला विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के नाम हटाने के आरोपों से जुड़ा है। वायरल वीडियो में हवामहल क्षेत्र के बीएलओ और सरकारी शिक्षक कीर्ति कुमार कथित तौर पर आत्महत्या की धमकी देते नजर आए। उन्होंने दावा किया कि उन पर नियमों का पालन किए बिना मुस्लिम मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाने का दबाव बनाया जा रहा था। इस वीडियो के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई।

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बीएलओ का दावा, दबाव में हटाने को कहा गया

कीर्ति कुमार ने बताया कि उनके इलाके से करीब 450 मतदाताओं के नाम हटाने का दबाव था। उन्होंने कहा कि एक पार्षद लगातार उनसे प्रक्रिया को नजरअंदाज कर नाम हटाने को कह रहे थे। हालांकि, वीडियो वायरल होने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने हस्तक्षेप किया और नियमों के तहत काम करने के निर्देश दिए।

कांग्रेस का आरोप, भाजपा की साजिश

कांग्रेस ने इस मामले को पूरे राजस्थान में चल रहे एक बड़े पैटर्न का हिस्सा बताया। पार्टी का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान भाजपा ने अल्पसंख्यक और कांग्रेस समर्थक मतदाताओं के नाम हटाने के लिए पहले से भरे हुए फॉर्म-7 जमा कराए। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला है।

भाजपा ने आरोप किए खारिज

भाजपा ने कांग्रेस के सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। हवामहल से भाजपा विधायक बालमुकुंद आचार्य ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से चल रही है। उन्होंने कांग्रेस पर चुनावी हार छिपाने का आरोप लगाया।

फॉर्म-7 को लेकर नए सवाल

राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के आंकड़ों के मुताबिक, भाजपा की ओर से 18,896 फॉर्म-7 आवेदन दिए गए, जबकि कांग्रेस ने केवल दो आवेदन जमा किए। कांग्रेस पार्षद अकबर पठान समेत कई लोगों ने दावा किया कि उनके नाम से जाली फॉर्म जमा किए गए।

अन्य जिलों में भी उठा मुद्दा

अलवर और बाड़मेर जैसे जिलों से भी इसी तरह की शिकायतें सामने आई हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि हजारों नाम हटाने की सिफारिश की गई है। वहीं, भाजपा और राज्य सरकार इसे फर्जी और दोहरे पंजीकरण को हटाने की सामान्य प्रक्रिया बता रही है। इस पूरे विवाद ने राजस्थान में आगामी चुनावों से पहले सियासी तापमान और बढ़ा दिया है।

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