राजस्थान में निचले स्तर के हेल्थ इंस्टीट्यूशन की स्थिति चिंताजनक पाई गई है। हेल्थ डिपार्टमेंट द्वारा कराए गए रैंडम सर्वे में कई गंभीर कमियां सामने आई हैं। 64 प्रतिशत हेल्थ सेंटरों पर एम्बुलेंस ही उपलब्ध नहीं है।
560 सेंटरों पर हुआ औचक सर्वे
सर्वे में कुल 560 स्वास्थ्य संस्थानों को शामिल किया गया। इनमें 321 सब सेंटर, 161 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC), 56 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC), 1 सैटेलाइट हॉस्पिटल, 17 उप-जिला अस्पताल और 3 जिला अस्पताल शामिल थे। यह सर्वे जोनल ज्वाइंट डायरेक्टर, सीएमएचओ, डिप्टी सीएमएचओ, पीएमओ और मेडिकल ऑफिसर इंचार्ज की टीमों ने किया। 500 से ज्यादा अधिकारियों ने औचक निरीक्षण किया।
64% सेंटरों पर एम्बुलेंस नहीं
239 केंद्रों पर एम्बुलेंस की उपलब्धता की जांच की गई। इनमें से केवल 36 प्रतिशत यानी 85 केंद्रों पर ही एम्बुलेंस मिली। जबकि 154 केंद्रों पर एम्बुलेंस नहीं थी। जहां एम्बुलेंस उपलब्ध थी, वहां भी 4 प्रतिशत यानी 3 एम्बुलेंस खराब हालत में मिलीं। केवल 82 एम्बुलेंस ही मरीजों के उपयोग के योग्य पाई गईं।
2% केंद्र समय पर नहीं खुले
सुबह 9 बजे निरीक्षण के दौरान 2 प्रतिशत केंद्र बंद मिले। वहां न डॉक्टर मौजूद थे और न ही पैरामेडिकल स्टाफ। इसके अलावा 1 प्रतिशत यानी 7 संस्थानों में हालात बेहद खराब पाए गए। वहां दवाइयों और बुनियादी सुविधाओं का अभाव था। हालांकि 123 संस्थानों में सुविधाओं का स्तर संतोषजनक पाया गया।
स्वच्छता और सुविधाओं की भी कमी
सर्वे में 9 प्रतिशत केंद्रों पर स्वच्छता की स्थिति खराब पाई गई। कई जगहों पर पर्याप्त स्टाफ और दवाइयों की कमी भी सामने आई। रिपोर्ट से साफ है कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की जरूरत है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर सुधार से ही स्थिति बदलेगी।
