लोन ने दिया नया जीवन, अब लाखों कमाती हैं रांची की सुनीता

कजरी कॉटन साड़ी बनाती रांची की महिला उद्यमी
स्वयं सहायता समूह से लोन लेकर शुरू किया साड़ी व्यवसाय, आज देशभर में पहचान।

घर की चारदीवारी से राष्ट्रीय पहचान तक का सफर

Ranchi की रहने वाली सुनीता लकड़ा की कहानी संघर्ष और सफलता की मिसाल है। एक समय था जब वह घर की चारदीवारी तक सीमित थीं। आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी। यहां तक कि उनके पास ₹1 भी पूंजी नहीं थी। लेकिन फिर उन्होंने एक स्वयं सहायता समूह से जुड़ने का फैसला किया। इसी फैसले ने उनकी जिंदगी बदल दी।

लोन से शुरू हुआ साड़ी का कारोबार

समूह से उन्हें लोन मिला। इसके बाद उन्होंने साड़ी बनाने का काम शुरू किया। खास तौर पर Kajri Cotton Saree तैयार करना शुरू किया। यह साड़ी गर्मियों में काफी पसंद की जाती है। इसका वजन लगभग 50 ग्राम होता है। सबसे खास बात यह है कि इसमें पूरी तरह हाथ से कारीगरी की जाती है। मशीन का कोई इस्तेमाल नहीं होता। इस साड़ी की कीमत 2000 रुपये से शुरू होकर 20000 रुपये तक जाती है।

25 महिलाओं का बना मजबूत समूह

सुनीता बताती हैं कि उनके समूह का नाम ‘मार्शल प्राथमिक बुनकर सहयोग समिति’ है। फिलहाल इस समूह में 25 महिलाएं काम कर रही हैं। सरकार की मदद से उन्हें समय-समय पर लोन मिल जाता है। जरूरत पड़ने पर बीच में भी ऋण उठाया जा सकता है। पहले जहां घर का राशन जुटाना मुश्किल था, आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है।

बच्चों की पढ़ाई से त्योहार तक अब नहीं चिंता

अब वे आराम से घर का खर्च चला रही हैं। बच्चों को प्राइवेट स्कूल में पढ़ा रही हैं। पहले त्योहार का नाम सुनते ही चिंता बढ़ जाती थी। अब वही त्योहार धूमधाम से मनाए जाते हैं। उनके चेहरे पर आत्मविश्वास साफ झलकता है।

देशभर में लगाती हैं स्टॉल

आज सुनीता सिर्फ रांची तक सीमित नहीं हैं। वह धनबाद, हजारीबाग, दिल्ली, केरल, जयपुर, उड़ीसा और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में मेले और प्रदर्शनियों में स्टॉल लगाती हैं। सरकार की ओर से कई बार मुफ्त स्टॉल भी उपलब्ध कराया जाता है। इससे उन्हें देश घूमने का मौका भी मिलता है और कमाई भी होती है। अब उनके हाथ में बेहतरीन हुनर है। आत्मनिर्भरता है। सम्मान है। सुनीता लकड़ा की यह कहानी बताती है कि सही दिशा, थोड़ी हिम्मत और समूह की ताकत से जिंदगी की तस्वीर बदली जा सकती है।

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