कमजोर तिमाही नतीजे, जियोपॉलिटिक्स और रिटेल दबाव ने बढ़ाई निवेशकों की चिंता
साल की शुरुआत में ही Reliance पर दबाव
देश के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में शामिल Mukesh Ambani की Reliance Industries के लिए 2026 की शुरुआत निराशाजनक रही है। जनवरी महीने में कंपनी के शेयरों में करीब 10 फीसदी की तेज गिरावट दर्ज की गई है। यह गिरावट इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि जनवरी में इतनी बड़ी कमजोरी Reliance के शेयरों में आखिरी बार 2011 में देखने को मिली थी। कमजोर बाजार धारणा के बीच निवेशकों का भरोसा फिलहाल डगमगाया हुआ नजर आ रहा है। करीब 19.12 लाख करोड़ रुपये के मार्केट कैप वाली Reliance Industries में आई इस गिरावट का असर broader market पर भी दिखा है। इसके चलते Nifty 50 अब तक लगभग 2 फीसदी तक फिसल चुका है। वहीं, कमजोर तिमाही नतीजों के बाद एक ही कारोबारी सत्र में शेयर करीब 3 फीसदी तक टूट गए।
Geopolitics और Refining Business बना बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि Reliance के ऑयल-टू-केमिकल और रिफाइनिंग बिजनेस पर वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर पड़ा है। रूस से कच्चे तेल की सप्लाई में कटौती और बढ़ती फ्रेट कॉस्ट ने लागत को बढ़ा दिया है। ब्रोकरेज फर्म Jefferies के मुताबिक, पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के कारण दिसंबर में Reliance ने रूस से तेल आयात में 32.4 फीसदी की कमी की है। यह स्तर फरवरी 2024 के बाद सबसे निचला माना जा रहा है। जनवरी में भी रूसी तेल आयात कमजोर रहने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, कंपनी वेनेजुएला से तेल आयात फिर से शुरू करने को लेकर अमेरिका से बातचीत कर रही है। इससे भविष्य में रूसी सप्लाई की कमी की भरपाई हो सकती है।
Retail Business बनी कमजोर कड़ी
जहां एक ओर फ्यूल बिजनेस में बेहतर फ्यूल क्रैक्स से कुछ राहत मिली है, वहीं Reliance Retail कंपनी की कमजोर कड़ी बनकर उभरी है। Reliance Retail की नेट रेवेन्यू ग्रोथ सिर्फ 9 फीसदी रही, जबकि प्रतिद्वंद्वी Avenue Supermarts यानी DMart ने 13 फीसदी की ग्रोथ दर्ज की। त्योहारों की तारीखों में बदलाव और कंज्यूमर प्रोडक्ट्स डिवीजन के डिमर्जर को इसका कारण बताया गया है। इसके अलावा, फेस्टिव सीजन में भारी छूट और क्विक कॉमर्स में निवेश से मार्जिन पर दबाव बढ़ा है।
Quick Commerce में अवसर और जोखिम
भारत में उपभोक्ता व्यवहार तेजी से बदल रहा है। अब फोकस ऑफलाइन से ऑनलाइन और फिर क्विक कॉमर्स की ओर शिफ्ट हो रहा है। 10 मिनट डिलीवरी मॉडल में बड़े अवसर हैं लेकिन जोखिम भी कम नहीं हैं। हालांकि Reliance का दावा है कि उसका क्विक कॉमर्स बिजनेस पहले से ही मुनाफे में है और मजबूत ओम्नी-चैनल नेटवर्क उसे बढ़त देता है।
Jio IPO से जगी उम्मीद
चुनौतियों के बीच Jio Platforms IPO को लेकर निवेशकों में उम्मीद बनी हुई है। सरकार की ओर से न्यूनतम 2.5 फीसदी हिस्सेदारी के सार्वजनिक निर्गम को मंजूरी मिल चुकी है। विश्लेषकों का मानना है कि लंबी अवधि में Reliance Industries shares में दोबारा मजबूती आ सकती है।
