रिंकू सिंह के पिता को स्टेज-4 लिवर कैंसर

अस्पताल के ICU में वेंटिलेटर सपोर्ट पर मरीज और लिवर कैंसर का मेडिकल डायग्राम
स्टेज-4 लिवर कैंसर में रिकवरी की संभावना सीमित, लेकिन इलाज के आधुनिक विकल्प उपलब्ध।

क्या रिकवरी संभव है? डॉक्टर प्रज्ञा शुक्ला से समझिए पूरी स्थिति

टीम इंडिया के बल्लेबाज रिंकू सिंह को टी-20 वर्ल्डकप छोड़कर भारत लौटना पड़ा है। उनके पिता खानचंद्र सिंह को स्टेज-4 लिवर कैंसर के चलते नोएडा के एक निजी अस्पताल में भर्ती किया गया है। मौजूदा जानकारी के अनुसार वे वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं। इस बीच सवाल उठ रहा है — क्या स्टेज-4 लिवर कैंसर से रिकवरी संभव है?

🩺 डॉक्टर क्या कहती हैं?

डॉ. प्रज्ञा शुक्ला, हेड, क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी, दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट के अनुसार, सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि कैंसर का प्राइमरी सोर्स क्या है।

क्या यह:

  • लिवर में ही शुरू हुआ कैंसर है?
    या
  • शरीर के किसी अन्य हिस्से से फैलकर (मेटास्टेसिस) लिवर तक पहुंचा है?

आमतौर पर स्टेज-4 लिवर कैंसर में पूरी तरह ठीक होने की संभावना कम होती है।
अगर मरीज वेंटिलेटर पर है, तो संभव है कि अन्य अंग भी प्रभावित हों।
ऐसी स्थिति को क्रिटिकल माना जाता है।

⚠️ क्या हर स्टेज-4 मरीज की स्थिति एक जैसी होती है?

नहीं। डॉक्टर के अनुसार, हर केस अलग होता है।

अगर:

  • लिवर का छोटा हिस्सा प्रभावित है,
  • और लिवर की कार्यक्षमता ज्यादा खराब नहीं हुई है,

तो सर्जरी (लिवर रिसेक्शन) या स्टीरियोटेक्टिक बॉडी रेडिएशन थेरेपी जैसे विकल्प अपनाए जा सकते हैं। हालांकि स्टेज-4 में अधिकतर मामलों में बीमारी शरीर में फैल चुकी होती है। इसलिए इलाज का फोकस जीवन की गुणवत्ता सुधारने और बीमारी को नियंत्रित करने पर होता है।

🔍 लिवर कैंसर के सामान्य लक्षण

  • पीलिया
  • भूख कम लगना
  • तेजी से वजन घटना
  • बुखार
  • अत्यधिक थकान
  • शरीर में खुजली

🧬 लिवर कैंसर के प्रकार

  1. मेटास्टेटिक कैंसर – जब कैंसर शरीर के अन्य हिस्से (जैसे ब्रेस्ट, लंग, ओरल) से फैलकर लिवर में पहुंचता है।
  2. प्राइमरी लिवर कैंसर – जैसे हेपैटोसेलुलर कार्सिनोमा या कोलेंजियोकार्सिनोमा, जो सीधे लिवर में विकसित होता है।

शुरुआती स्टेज में इलाज के बाद मरीज कई वर्षों तक सामान्य जीवन जी सकते हैं।
लेकिन स्टेज-4 में स्थिति जटिल हो जाती है।

📌 कितनी है उम्मीद?

स्टेज-4 लिवर कैंसर में पूर्ण रिकवरी की संभावना सीमित होती है।
हालांकि आधुनिक दवाएं, टारगेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी से कुछ मामलों में जीवन अवधि और गुणवत्ता बेहतर की जा सकती है। अंततः हर मरीज की स्थिति उसके शरीर की प्रतिक्रिया, अंगों की कार्यक्षमता और इलाज के प्रकार पर निर्भर करती है।

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