जोधपुर HC के आदेश से 50+ निजी स्कूलों पर असर, PP1-PP3 में भी कमजोर वर्ग को मिलेगा आरक्षण
जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ ने शिक्षा के अधिकार कानून (RTE) को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जिन निजी स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाएं (PP1, PP2, PP3) संचालित हैं, वहां एंट्री लेवल इन्हीं कक्षाओं को माना जाएगा और इसी स्तर से 25% सीटों पर वंचित एवं कमजोर वर्ग के बच्चों को प्रवेश देना अनिवार्य होगा। अब स्कूल केवल “मान्यता कक्षा-1 से है” कहकर प्री-प्राइमरी में RTE लागू करने से बच नहीं सकेंगे।
यह फैसला जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस चंद्र शेखर शर्मा की खंडपीठ ने 16 जनवरी को राज्य सरकार की 7 स्पेशल अपीलों का निस्तारण करते हुए दिया। इस आदेश का असर जोधपुर, भीलवाड़ा सहित प्रदेश के करीब 52 निजी स्कूलों पर पड़ेगा, जहां अब नॉन-आरटीई के साथ-साथ प्री-प्राइमरी स्तर पर भी 25% आरटीई प्रवेश करना होगा।
कोर्ट में सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने सहमति जताई कि मामला ‘रुकमणि बिड़ला मॉडर्न हाई स्कूल बनाम राजस्थान राज्य’ केस से कवर होता है, जिसका निर्णय 8 जनवरी को आ चुका है। उसी आधार पर वर्तमान अपीलें भी निस्तारित की गईं।
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि प्री-प्राइमरी स्तर पर 25% कोटा पूरा हो चुका है, तो कक्षा-1 में नए 25% बच्चों की जरूरत नहीं होगी, लेकिन कक्षा-1 में कुल छात्रों का 25% अनुपात वंचित वर्ग से बना रहना जरूरी है। साथ ही यदि कक्षा-1 में कुल संख्या बढ़ती है तो उसी अनुपात में आरटीई सीटें भी बढ़ानी होंगी। कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश के अनुसार नया सर्कुलर जारी कर नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
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