राजस्थान में परिवहन विभाग के भीतर संगठित भ्रष्टाचार का एसीबी ने किया बड़ा खुलासा
राजस्थान के परिवहन विभाग में फैले भ्रष्टाचार की एक और परत उस समय खुल गई, जब भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने आरटीओ इंस्पेक्टर की अवैध वसूली गैंग का पर्दाफाश किया। जांच में सामने आया कि एक आरटीओ इंस्पेक्टर ने दलालों का पूरा नेटवर्क खड़ा कर रखा था, जो हाईवे पर चलने वाले ओवरलोड और अवैध वाहनों से नियमित रूप से रिश्वत वसूलता था। एसीबी के अनुसार, यह अवैध वसूली पूरी तरह से सुनियोजित थी। वाहनों की एक तय सूची बनाई जाती थी और उसी आधार पर प्रति वाहन या मासिक बंधी के रूप में रकम वसूली जाती थी। इस पूरी रकम का बड़ा हिस्सा सीधे आरटीओ इंस्पेक्टर तक पहुंचाया जाता था, जबकि दलालों को फिक्स कमीशन दिया जाता था।
सर्विलांस से खुला पूरा नेटवर्क
एसीबी मुख्यालय को सूचना मिलने के बाद ऋषिराज सिंह, विक्रम प्रताप सिंह और निर्मल सहित कई आरोपियों के मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लिए गए। बातचीत के विश्लेषण से साफ हुआ कि अवैध वसूली का पूरा खेल हाईवे पर सक्रिय एक कॉल सेंटर जैसी व्यवस्था से चलाया जा रहा था। वाहन नंबर व्हाट्सऐप पर फॉरवर्ड किए जाते थे और डिजिटल पेमेंट, पेटीएम व नकद के जरिए लेन-देन होता था।
होटल और ढाबों से होता था लेन-देन
जांच में सामने आया कि रिश्वत की रकम हाईवे स्थित होटल, ढाबों और चाय की दुकानों पर इकट्ठा की जाती थी। सर्च के दौरान होटल शेरे पंजाब, होटल आरजे-01 और जगदंबा टी स्टॉल जैसे ठिकानों से अवैध वसूली के सबूत मिले।
ट्रांसफर के बाद भी खेल जारी
एसीबी की जांच में यह भी सामने आया कि आरटीओ इंस्पेक्टर के ट्रांसफर के बाद दलालों ने कुछ दिन तक वसूली की रकम अपने पास रोक ली थी, ताकि कम राशि देनी पड़े। यह तथ्य पूरे सिस्टम में फैले भ्रष्टाचार की गहराई को दर्शाता है।
13 आरोपियों पर FIR दर्ज
एसीबी ने आरटीओ इंस्पेक्टर जल सिंह मीणा सहित कुल 13 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। एडिशनल एसपी ज्ञान प्रकाश नवल के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है और आगे और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
