1,856 मेगावाट परियोजना पर शुरू हुई सियासी और कूटनीतिक जंग
चिनाब नदी पर प्रस्तावित सवालकोट जलविद्युत परियोजना को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच नया विवाद खड़ा हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार ने 1,856 मेगावाट क्षमता वाली इस परियोजना की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है। इसके बाद पाकिस्तान के मीडिया और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। दरअसल, सिंधु जल संधि को प्रभावी रूप से ठंडे बस्ते में डाले जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में शुरू की जा रही यह पहली बड़ी रणनीतिक परियोजना मानी जा रही है। इसलिए इसे क्षेत्रीय संतुलन के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
पाकिस्तानी मीडिया ने बताया ‘वॉटर टेररिज्म’
सवालकोट परियोजना की खबर सामने आते ही पाकिस्तान के कई बड़े टीवी चैनलों और अखबारों ने इसे ‘फिफ्थ जनरेशन वॉरफेयर’ करार दिया। कुछ ने इसे ‘वॉटर टेररिज्म’ तक कहा। आरोप लगाया गया कि भारत चिनाब नदी के पानी को हथियार की तरह इस्तेमाल करना चाहता है। हालांकि, भारत ने इन आरोपों को खारिज किया है।
सिंधु जल संधि पर मतभेद
पाकिस्तान विदेश मंत्रालय ने इस परियोजना पर गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यह 1960 की सिंधु जल संधि का उल्लंघन है। पाकिस्तान ने इस मुद्दे को दोनों देशों के सिंधु जल आयुक्तों के स्तर पर उठाया है। वहीं भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया कि देश के भीतर होने वाली विकास परियोजनाएं भारत के संप्रभु अधिकार के तहत आती हैं।
क्या है सवालकोट परियोजना?
NHPC लिमिटेड द्वारा विकसित की जा रही यह परियोजना जम्मू-कश्मीर के उधमपुर और रामबन जिलों में चिनाब नदी पर स्थित है। इसकी अनुमानित लागत 5,129 करोड़ रुपये है।
परियोजना रन-ऑफ-द-रिवर मॉडल पर आधारित है। इसमें 192.5 मीटर ऊंचा रोलर कॉम्पैक्टेड कंक्रीट ग्रैविटी डैम बनाया जाएगा। साथ ही तीन सुरंगों के माध्यम से पानी मोड़ा जाएगा। डैम के नीचे 1,800 मेगावाट का भूमिगत पावर हाउस बनेगा, जिसमें 225 मेगावाट की 8 इकाइयां होंगी। इसके अतिरिक्त 56 मेगावाट की पर्यावरणीय प्रवाह परियोजना भी संचालित की जाएगी। इस तरह कुल क्षमता 1,856 मेगावाट होगी।
रणनीतिक संकेत और क्षेत्रीय असर
सवालकोट परियोजना को चिनाब बेसिन में तेजी से आगे बढ़ाई जा रही अन्य परियोजनाओं जैसे पाकल दुल, किरू और रैटल डैम के साथ जोड़ा जा रहा है। ऐसे में इसे केवल ऊर्जा परियोजना नहीं, बल्कि रणनीतिक बुनियादी ढांचे के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, दोनों देशों के बीच जल विवाद नया नहीं है। लेकिन इस बार सवालकोट ने कूटनीतिक तापमान जरूर बढ़ा दिया है।
