SGPC का बड़ा फैसला: गोल्डन टेंपल के हेड ग्रंथी ज्ञानी रघबीर सिंह सेवानिवृत्त

Golden Temple Amritsar with SGPC decision regarding Head Granthi retirement
SGPC ने श्री हरिमंदिर साहिब के हेड ग्रंथी ज्ञानी रघबीर सिंह को सेवानिवृत्त किया।

72 घंटे के नोटिस का नहीं मिला जवाब, कार्यकारिणी बैठक में लिया गया निर्णय

अमृतसर में बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया गया।
Shiromani Gurdwara Parbandhak Committee (SGPC) ने गुरुवार को अहम घोषणा की।
समिति ने Sri Harmandir Sahib के हेड ग्रंथी Giani Raghbir Singh को तत्काल प्रभाव से सेवानिवृत्त कर दिया।
यह फैसला अमृतसर में हुई कार्यकारिणी समिति की बैठक में लिया गया। बैठक करीब एक घंटे चली।
इसके बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई। एसजीपीसी अध्यक्ष Harjinder Singh Dhami ने जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि ज्ञानी रघबीर सिंह को 72 घंटे का नोटिस दिया गया था। नोटिस में सार्वजनिक आरोपों के समर्थन में दस्तावेज मांगे गए थे। हालांकि, तय समय सीमा में कोई जवाब नहीं मिला। इसी कारण समिति ने अनुशासनात्मक कार्रवाई की।

18 फरवरी की प्रेस बातचीत से शुरू हुआ विवाद

विवाद की शुरुआत 18 फरवरी 2026 को हुई। जालंधर में एक प्रेस बातचीत के दौरान ज्ञानी रघबीर सिंह ने एसजीपीसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कथित अनियमितताओं का उल्लेख किया। साथ ही धार्मिक पांडुलिपियों और प्रशासनिक मामलों को भी उठाया। इसके बाद मामला तूल पकड़ गया। 19 फरवरी को एसजीपीसी ने 72 घंटे का अल्टीमेटम जारी किया।
कमेटी ने कहा कि बिना प्रमाण सार्वजनिक आरोप लगाने से संस्था की छवि प्रभावित होती है। इसलिए जवाब जरूरी था।

ज्ञानी रघबीर सिंह का वीडियो संदेश

दूसरी ओर, ज्ञानी रघबीर सिंह ने वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने धार्मिक जिम्मेदारी निभाई है।
उन्होंने दावा किया कि उनके पास दस्तावेज मौजूद हैं। उनका कहना था कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए उन्होंने यह कदम उठाया। गौरतलब है कि दिसंबर 2025 में उन्हें Akal Takht के कार्यकारी जत्थेदार पद से हटाया गया था।
हालांकि, तब वे हेड ग्रंथी के पद पर बने रहे। अब ताजा फैसले के बाद धार्मिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
एसजीपीसी का कहना है कि निर्णय संस्था के नियमों और अनुशासन के तहत लिया गया है।

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