बुधवार को नाबालिग पीड़ितों का मेडिकल परीक्षण कराया था।
प्रयागराज में शंकराचार्य से जुड़े यौन उत्पीड़न मामले में नया मोड़ आ गया है। पुलिस सूत्रों का दावा है कि नाबालिगों की मेडिकल रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि हुई है। हालांकि आधिकारिक बयान अभी जारी नहीं किया गया है। मामला अदालत में विचाराधीन है।
मेडिकल जांच की रिपोर्ट कोर्ट में पेश होगी
बुधवार को पीड़ित नाबालिगों का मेडिकल परीक्षण कराया गया। दो डॉक्टरों के पैनल ने सरकारी अस्पताल में जांच की। इसके बाद रिपोर्ट बंद लिफाफे में जांच अधिकारी को सौंप दी गई। अब इसे कोर्ट में पेश किया जाएगा। झूंसी थाना प्रभारी ने कहा कि मामला कोर्ट में है। इसलिए अधिक जानकारी साझा नहीं की जा सकती। पुलिस का कहना है कि पूरी जांच के बाद ही आरोपों की सच्चाई स्पष्ट होगी।
पीड़ित का बयान सामने आया
एक पीड़ित बटुक पहली बार मीडिया के सामने आया। उसने दावा किया कि अध्ययन के दौरान उसका शोषण किया गया। उसने यह भी कहा कि अन्य बच्चों के साथ भी गलत कृत्य हुआ। पीड़ित ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद पर आरोप लगाए। मामले में अन्य नामों का भी उल्लेख किया गया है।
शिकायत से FIR तक का सफर
18 जनवरी को माघ मेला के दौरान विवाद हुआ था। इसके बाद 24 जनवरी को शिकायत दर्ज कराई गई। 8 फरवरी को स्पेशल POCSO कोर्ट में याचिका दायर की गई। 13 फरवरी को दो बच्चों को अदालत में पेश किया गया। 21 फरवरी को बयान दर्ज हुए। कोर्ट के आदेश पर झूंसी थाने में FIR दर्ज की गई। FIR में शंकराचार्य, उनके शिष्य और कुछ अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है।
अग्रिम जमानत और साजिश का आरोप
शंकराचार्य ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की है। उन्होंने आरोपों को साजिश बताया है। उन्होंने कहा कि मठ में कुछ भी छिपाने जैसा नहीं है। साथ ही सुरक्षा कारणों से कैमरे की अनुमति सीमित रखने की बात कही।
वकील को मिली धमकी
मामले में एक और मोड़ आया है। शंकराचार्य के वकील को धमकी भरा संदेश मिला। संदेश में वाराणसी कचहरी को बम से उड़ाने की धमकी दी गई। फिलहाल प्रयागराज पुलिस वाराणसी में जांच कर रही है। पूछताछ की संभावना बनी हुई है।
यह मामला धार्मिक संस्थानों की जवाबदेही और बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा है। अदालत की प्रक्रिया और जांच के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।
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