हाईकोर्ट बोला– अधिकतम सजा 3 साल, आरोपी करीब 2 साल से जेल में
सब इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा-2021 पेपरलीक मामले के मुख्य आरोपी जगदीश विश्नोई को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। जस्टिस चंद्रप्रकाश श्रीमाली की एकलपीठ ने आरोपी को जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पेपरलीक से जुड़े स्पेशल एक्ट में जिन धाराओं के तहत आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज है, उनमें अधिकतम सजा तीन साल की है। वहीं आरोपी करीब दो साल से जेल में बंद है। इसके अलावा अब तक मामले में आरोप तय नहीं हुए हैं।
ट्रायल में लगेगा लंबा समय, इसलिए जमानत
हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में आरोपियों और गवाहों की संख्या काफी ज्यादा है। कुल 133 आरोपी और करीब 150 गवाह हैं। ऐसे में ट्रायल पूरा होने में लंबा समय लगना तय है। इसी आधार पर अदालत ने आरोपी को जमानत देना उचित माना।
सरकार ने किया जमानत का विरोध
जमानत का विरोध करते हुए विशेष लोक अभियोजक अनुराग शर्मा ने दलील दी कि जगदीश विश्नोई इस पूरे पेपरलीक गिरोह का मुख्य सरगना है। उसने संगठित गैंग बनाकर भर्ती प्रक्रिया की पवित्रता को भंग किया। अभियोजन के अनुसार आरोपी ने रविंद्र बाल भारती स्कूल के संचालक राजेश खंडेलवाल से 10 लाख रुपए में प्रश्नपत्र का सौदा किया। परीक्षा से पहले पेपर व्हाट्सएप के जरिए मंगवाया गया, सॉल्वर से हल करवाया गया और मोटी रकम लेकर अभ्यर्थियों को सॉल्व पेपर पढ़वाया गया। इस प्रक्रिया के जरिए 25 अभ्यर्थियों का एसआई भर्ती में चयन हुआ। जांच के दौरान आरोपी के पास से लेन-देन का पूरा हिसाब-किताब रखने वाली डायरी भी बरामद हुई है।
12 मामलों में 7 में जमानत, 5 में बरी
आरोपी के अधिवक्ता सुधीर जैन ने अदालत को बताया कि इस केस में स्कूल संचालक राजेश खंडेलवाल को पहले ही सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। जगदीश विश्नोई 15 मार्च 2024 से जेल में है। उन्होंने बताया कि आरोपी के खिलाफ कुल 12 मामले दर्ज हैं। इनमें से 7 मामलों में उसे जमानत मिल चुकी है, जबकि 5 मामलों में वह बरी हो चुका है।
10 महीने पहले JEN भर्ती केस में भी मिली थी जमानत
जगदीश विश्नोई को करीब 10 महीने पहले JEN भर्ती-2020 पेपरलीक मामले में भी जमानत मिल चुकी थी। हालांकि एसआई भर्ती केस में जेल में बंद होने के कारण वह बाहर नहीं आ सका था। अब इस केस में भी जमानत मिलने के बाद उसकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।
‘गुरुजी’ के नाम से जाना जाता था मास्टरमाइंड
सांचौर जिले के दांता निवासी जगदीश विश्नोई को गिरोह के लोग ‘गुरुजी’ या ‘मास्टरमाइंड’ कहकर बुलाते थे। उसने साल 2005 में बीएड की फर्जी डिग्री खरीदी और 2007 में पेपरलीक के जरिए थर्ड ग्रेड टीचर बना। टीचर रहते हुए ही उसके खिलाफ नकल और पेपरलीक के कई मामले दर्ज हुए। 2008 से 2019 के बीच वह कई बार जेल गया, फरार रहा और दोबारा गिरफ्तार होता रहा। फरवरी 2024 में एक बार फिर उसकी गिरफ्तारी हुई थी।
