10 हजार किमी उड़कर राजस्थान पहुंचे साइबेरियन सारस, बीकानेर बना नया हॉटस्पॉट

Siberian cranes flock at Lunkaransar wetland in Bikaner
Thousands of Siberian cranes gather at Lunkaransar wetland in Bikaner

रेगिस्तान की खारी झीलें आईं पसंद, लूणकरणसर में 25 हजार कुरजां से टूटा रिकॉर्ड

रूस, मंगोलिया और कजाकिस्तान की बर्फीली धरती से करीब 10 हजार किलोमीटर का लंबा सफर तय कर आने वाले साइबेरियन सारस (कुरजां) इस बार राजस्थान में नया ठिकाना बना रहे हैं। भरतपुर, जैसलमेर, बाड़मेर और चूरू के बाद अब बीकानेर के लूणकरणसर वेटलैंड में रिकॉर्ड संख्या में कुरजां पहुंचे हैं। इस सीजन में यहां 25 हजार से ज्यादा प्रवासी पक्षी दर्ज किए गए हैं, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। ये प्रवासी पक्षी करीब 26 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकते हैं और झुंड में उड़ते समय “V” आकार बनाते हैं। दिसंबर से फरवरी तक राजस्थान में प्रवास करने के बाद ये फिर अपने मूल स्थानों की ओर लौट जाते हैं। इस दौरान देश-विदेश से सैलानी इन्हें देखने लूणकरणसर पहुंच रहे हैं और पक्षियों की सामूहिक उड़ान को कैमरे में कैद कर रहे हैं।

10 साल में 50 गुना बढ़ी संख्या

बीकानेर क्षेत्र में कुरजां का आगमन पिछले लगभग 10 वर्षों से दर्ज किया जा रहा है। शुरुआती दौर में जहां केवल 500–700 कुरजां आते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 25 हजार तक पहुंच गई है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार हर साल औसतन 20 से 30 प्रतिशत की वृद्धि देखी जा रही है। इसका मुख्य कारण लूणकरणसर और आसपास के गांवों में सुरक्षित वातावरण और पर्याप्त भोजन की उपलब्धता है।

माइनस 50 डिग्री से रेगिस्तान की ओर

डेमोसाइल क्रेन प्रजाति के ये पक्षी सितंबर-अक्टूबर में साइबेरिया, मंगोलिया और कजाकिस्तान से उड़ान भरते हैं। वहां सर्दियों में तापमान माइनस 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, जिससे जीवन कठिन हो जाता है। ऐसे में राजस्थान का अपेक्षाकृत अनुकूल मौसम इन्हें आकर्षित करता है।

खारे पानी की झील बनी पसंद

लूणकरणसर की झील का नमकीन (खारा) पानी कुरजां को विशेष रूप से पसंद आ रहा है। खारे जल में पनपने वाले सूक्ष्म जलीय जीव, शैवाल और कीट इनके प्राकृतिक आहार का हिस्सा हैं। कम मानव गतिविधि, उथला जल और खुले मैदान इस क्षेत्र को सुरक्षित प्रवास स्थल बनाते हैं।

2024 में वेटलैंड घोषित

वर्ष 2024 में लूणकरणसर क्षेत्र को वेटलैंड घोषित किए जाने के बाद इसका पर्यावरणीय और पर्यटन महत्व और बढ़ गया है। बीकानेर-श्रीगंगानगर हाईवे के पास स्थित यह इलाका अब एक नया टूरिस्ट स्पॉट बन रहा है। प्रशासन इसे रामसर साइट का दर्जा दिलाने के प्रयास भी कर रहा है।

खीचन से लूणकरणसर की ओर शिफ्ट

फलोदी के खीचन क्षेत्र में भीड़ और सीमित क्षेत्र के कारण कुरजां अब नए और खुले इलाकों की तलाश में लूणकरणसर की ओर शिफ्ट हो रहे हैं। यहां प्राकृतिक भोजन और बड़ा क्षेत्र मिलने से बीकानेर तेजी से कुरजां हब बनता जा रहा है।

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