सीकर कृषि मंडी में 55 लाख की बड़ी धोखाधड़ी, फर्जी बिलों से दुकान हड़पने का खेल उजागर

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सीकर कृषि मंडी में फर्जी दस्तावेजों से दुकान अलॉटमेंट का मामला

फर्जी फर्म के दस्तावेज लगाकर दुकान अलॉट, फिर रकम लेकर भी नहीं लौटाई दुकान

फर्जी दस्तावेजों से दुकान अलॉट कराने का आरोप

सीकर कृषि उपज मंडी में 55 लाख से ज्यादा की धोखाधड़ी का गंभीर मामला सामने आया है। फर्जी फर्म के बिल लगाकर दुकान अलॉट कराने और फिर मोटी रकम हड़पने का आरोप एक व्यापारी पर लगा है। उद्योग नगर थाना क्षेत्र में पहले रिपोर्ट दर्ज नहीं होने पर पीड़ित ने कोर्ट के इस्तगासे के जरिए मामला दर्ज करवाया है। इस मामले के सामने आने के बाद मंडी प्रशासन और व्यापारियों में हड़कंप मच गया है।

पीड़ित ने कोर्ट का खटखटाया दरवाजा

किरडोली निवासी हरिकिशन जाट ने रिपोर्ट में बताया कि वह प्याज का व्यापारी है और उसकी एक फर्म कृषि मंडी में पंजीकृत है। वर्ष 2023 में सीकर कृषि मंडी में नई दुकानों का अलॉटमेंट हुआ था। इसी दौरान आरोपी मालचंद महाजन ने हरिकिशन की फर्म के फर्जी बिल और दस्तावेज लगाकर दुकान नंबर R-6 अपने नाम अलॉट करवा ली।

शिकायत की कोशिश पर मांगे 55 लाख

पीड़ित हरिकिशन को जब 31 मार्च को इस अलॉटमेंट की जानकारी मिली तो उसने इसकी शिकायत करने की तैयारी की। इस पर आरोपी मालचंद महाजन ने मामला दबाने के लिए 55 लाख 8 हजार 700 रुपए लेकर दुकान लौटाने का आश्वासन दिया। भरोसा करके परिवादी ने आरोपी की बात मान ली और समझौते के तहत पैसे देने पर सहमति जताई।

ऑनलाइन और नकद दिए पैसे

रिपोर्ट के अनुसार हरिकिशन ने आरोपी की फर्म के बैंक खाते में 15 लाख 8 हजार 700 रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर किए। इसके अलावा शेष 40 लाख रुपए नकद दिए गए। आरोपी ने भरोसा दिलाया कि वह जल्द ही दुकान वापस लौटा देगा और किसी तरह की कानूनी कार्रवाई की जरूरत नहीं पड़ेगी।

न पैसे लौटे, न दुकान मिली

समय बीतता गया लेकिन आरोपी ने न तो दुकान लौटाई और न ही ली गई रकम वापस की। करीब तीन साल तक आरोपी अलग-अलग बहाने बनाकर पीड़ित को टालता रहा। आखिरकार परेशान होकर हरिकिशन जाट ने कोर्ट का सहारा लिया और इस्तगासे के जरिए उद्योग नगर थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज करवाया।

जांच में जुटी पुलिस

पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। फर्जी दस्तावेज, बैंक ट्रांजेक्शन और नकद लेनदेन से जुड़े साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। यह मामला सामने आने के बाद कृषि मंडी में अलॉटमेंट प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल उठने लगे हैं। पीड़ित को अब न्याय की उम्मीद है।

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