ग्रीनलैंड विवाद और वैश्विक तनाव के बीच सुरक्षित निवेश बना चांदी का सहारा
नई दिल्ली। वैश्विक बाजारों में एक बार फिर उथल-पुथल देखने को मिल रही है। इसी बीच चांदी की कीमतों में तूफानी तेजी दर्ज की गई है। सोमवार, 20 जनवरी 2026 को चांदी आधारित एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स यानी Silver ETFs ने अपने जीवनकाल का सबसे ऊंचा स्तर छू लिया। सबसे पहले घरेलू बाजार की बात करें। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर मार्च एक्सपायरी वाली चांदी करीब 3 प्रतिशत की छलांग लगाते हुए ₹3,18,729 प्रति किलोग्राम के नए ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गई। इसके साथ ही मई और जुलाई फ्यूचर्स में भी जबरदस्त तेजी देखने को मिली। मई फ्यूचर्स ₹3,28,854 और जुलाई फ्यूचर्स ₹3,35,885 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गए। वहीं दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी ने इतिहास रच दिया।
वैश्विक स्तर पर चांदी की कीमत $94.72 प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। इस तेजी ने निवेशकों का ध्यान एक बार फिर कीमती धातुओं की ओर खींच लिया है।
Silver ETF में जबरदस्त खरीदारी
इस उछाल का सीधा असर शेयर बाजार में लिस्टेड सिल्वर ETFs पर पड़ा।
Groww Silver ETF करीब 7 प्रतिशत की तेजी के साथ ₹308.37 पर पहुंच गया। इसके अलावा Tata, Motilal Oswal और Aditya Birla Silver ETFs में भी 5 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई। Nippon SilverBees और SBI Silver ETF लगभग 4 प्रतिशत की मजबूती के साथ अपने नए 52-सप्ताह के उच्च स्तर पर कारोबार कर रहे हैं।
चांदी में क्यों लगी ‘आग’?
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण भू-राजनीतिक तनाव है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर नियंत्रण को लेकर सैन्य विकल्प की बात कही है। इसके अलावा उन्होंने आठ यूरोपीय देशों पर नए टैरिफ लगाने का ऐलान भी किया है। 1 फरवरी से यूरोपीय आयात पर 10 प्रतिशत टैरिफ लागू होगा, जो जून तक 25 प्रतिशत हो सकता है। इन बयानों के बाद वैश्विक अनिश्चितता बढ़ गई है। नतीजतन, निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर भाग रहे हैं। इसी वजह से सोने और चांदी की मांग में तेज उछाल आया है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञ मानते हैं कि इतनी तेज तेजी के बाद जोखिम भी बढ़ गया है।
चांदी, सोने की तुलना में अधिक अस्थिर मानी जाती है। इसलिए नए निवेशकों को एकमुश्त निवेश से बचने की सलाह दी जा रही है। डॉलर कॉस्ट एवरेजिंग यानी DCA रणनीति अपनाना बेहतर विकल्प हो सकता है। अगर आपने शॉर्ट-टर्म के लिए निवेश किया है, तो इस स्तर पर आंशिक मुनाफावसूली समझदारी भरा कदम हो सकता है। वहीं, लॉन्ग-टर्म निवेशक फिलहाल होल्ड बनाए रख सकते हैं, लेकिन नए निवेश के लिए थोड़ा सुधार आने का इंतजार करना बेहतर रहेगा।
