भारतीय सिनेमा की पहली महिला सुपरस्टार
भारतीय सिनेमा के आकाश में श्रीदेवी एक ऐसा नाम हैं, जिनकी चमक आज भी कायम है। उन्हें भारतीय फिल्म उद्योग की ‘पहली महिला सुपरस्टार’ कहा जाता है। उन्होंने पांच दशकों तक दर्शकों के दिलों पर राज किया। उनका जन्म 13 अगस्त 1963 को तमिलनाडु के शिवकाशी के पास हुआ। उनका वास्तविक नाम श्री अम्मा यंगर अय्यप्पन था। पारिवारिक पृष्ठभूमि साधारण थी। लेकिन प्रतिभा असाधारण थी।
बाल कलाकार से नायिका तक
उन्होंने बाल कलाकार के रूप में अपने करियर की शुरुआत की। दक्षिण भारतीय फिल्मों में उन्होंने कम उम्र में ही पहचान बना ली। हिंदी सिनेमा में बतौर नायिका उनकी शुरुआत 1979 की फिल्म Solva Sawan से हुई। हालांकि, बड़ी सफलता बाद में मिली। 1983 में रिलीज हुई Himmatwala ने उन्हें शिखर पर पहुंचा दिया। इस फिल्म में उनके साथ जितेंद्र नजर आए। ‘नैनों में सपना’ गीत बेहद लोकप्रिय हुआ। इसके बाद उन्होंने कई सुपरहिट फिल्में दीं।
राष्ट्रीय सम्मान और उपलब्धियां
अपने करियर में उन्होंने अनेक पुरस्कार जीते। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से लेकर सात फिल्मफेयर अवॉर्ड तक। वर्ष 2013 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया। यह उनके योगदान की औपचारिक स्वीकृति थी।
‘इंग्लिश विंग्लिश’ से ऐतिहासिक वापसी
लगभग 15 वर्षों के अंतराल के बाद 2012 में उन्होंने दमदार वापसी की। फिल्म English Vinglish में उन्होंने ‘शशि गोडबोले’ का किरदार निभाया। यह एक साधारण गृहिणी की कहानी थी। फिल्म का निर्देशन गौरी शिंदे ने किया था। कहानी आत्मसम्मान और आत्मविश्वास की थी। श्रीदेवी के अभिनय को समीक्षकों ने सराहा। दर्शकों ने भी उन्हें खुले दिल से स्वीकार किया। इस फिल्म ने साबित कर दिया कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती। साथ ही, यह भी सिद्ध हुआ कि एक अभिनेत्री विवाह और लंबे अंतराल के बाद भी शिखर छू सकती है।
अंतिम पड़ाव और अमर विरासत
2018 में फिल्म Zero में उनका कैमियो अंतिम ऑन-स्क्रीन उपस्थिति बना। बाद में फिल्म Kalank के लिए उन्हें साइन किया गया था। लेकिन असमय निधन के कारण यह संभव नहीं हो सका। उनका सफर केवल फिल्मों तक सीमित नहीं था। वह सशक्त महिला किरदारों की प्रतीक बनीं। उन्होंने साबित किया कि अभिनेत्री भी बॉक्स ऑफिस की धुरी बन सकती है। आज भले ही वह हमारे बीच नहीं हैं। लेकिन उनकी मुस्कान, अभिनय और आत्मविश्वास हमेशा प्रेरणा देता रहेगा।
