तमिलनाडु के बाद तेलंगाना में डॉग किलिंग की घटनाएं तेज, जहर देकर मारे गए 100 से ज्यादा कुत्ते, मास्टरमाइंड की तलाश
हैदराबाद के आसपास क्यों बढ़ रही है डॉग किलिंग
दक्षिण भारत में आवारा कुत्तों की सामूहिक हत्या की घटनाएं लगातार चिंता बढ़ा रही हैं। तमिलनाडु में 500 से ज्यादा कुत्तों की हत्या के बाद अब तेलंगाना के हैदराबाद से सटे रंगारेड्डी जिले में 100 से अधिक आवारा कुत्तों को जहर देकर मारने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। यह घटना न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है, बल्कि इंसानियत को भी झकझोर रही है।
याचराम गांव में खौफनाक रात
तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले का याचराम गांव 19 जनवरी की रात एक भयावह मंजर का गवाह बना। ग्रामीणों के अनुसार, रातों-रात गांव से आवारा कुत्ते गायब हो गए। सुबह जब लोग घरों से बाहर निकले, तो सड़कों और खाली जगहों पर कुत्तों की लाशें पड़ी मिलीं। बताया जा रहा है कि करीब 100 कुत्तों को कथित तौर पर जहर देकर मारा गया। कई शव अब तक ठीक से हटाए भी नहीं गए, जिससे गांव में दहशत का माहौल है।
प्रोफेशनल किलर्स पर शक
पशु अधिकार कार्यकर्ताओं का दावा है कि यह काम किसी आम व्यक्ति का नहीं हो सकता। उनका कहना है कि इसमें प्रोफेशनल ‘डॉग किलर्स’ शामिल हो सकते हैं, जो जहरीले इंजेक्शन देकर जानवरों को तड़पा-तड़पा कर मारते हैं। आरोप है कि यह सब गांव के प्रभावशाली लोगों के इशारे पर किया गया।
सरपंच समेत तीन पर FIR
स्ट्रे एनिमल फाउंडेशन ऑफ इंडिया की प्रतिनिधि मुदावथ प्रीति की शिकायत पर याचराम पुलिस ने केस दर्ज किया है। बीएनएस की धारा 325 और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम की धारा 11(1)(a)(i) के तहत गांव के सरपंच, एक वार्ड मेंबर और गांव के सेक्रेटरी को आरोपी बनाया गया है। पुलिस का कहना है कि कुत्तों की लाशें कहां दफनाई गईं, इसकी भी जांच की जा रही है।
500 कुत्तों की हत्या से जुड़ता कनेक्शन
यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले कमारेड्डी, हनुमकोंडा और जगतियाल जिलों में 500 से ज्यादा कुत्तों को बेरहमी से मारा गया था। उन मामलों में भी स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर आरोप लगे थे। आशंका जताई जा रही है कि चुनावों से पहले गांवों को ‘कुत्ता-मुक्त’ बनाने के नाम पर यह साजिश रची जा रही है।
पशु प्रेमियों में गुस्सा, सोशल मीडिया पर बवाल
इन घटनाओं के बाद पशु प्रेमियों और संगठनों में जबरदस्त आक्रोश है। सोशल मीडिया पर #SaveStrayDogs ट्रेंड कर रहा है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि आवारा कुत्तों की समस्या का समाधान हत्या नहीं, बल्कि नसबंदी और वैक्सीनेशन प्रोग्राम हैं।
कानून हाथ में लेना क्यों गलत
विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों की सुरक्षा के नाम पर इस तरह की क्रूरता को सही नहीं ठहराया जा सकता। कानून अपने हाथ में लेना अपराध है और दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
