Tej Pratap Yadav–Aishwarya Rai केस: सुलह की आखिरी कोशिश या कानूनी जंग तेज?

फैमिली कोर्ट में आज तीसरी मध्यस्थता, क्या बदलेगा रुख?

तेजप्रताप यादव और ऐश्वर्या राय के तलाक मामले में आज फैमिली कोर्ट में एक बार फिर सुलह की कोशिश की जाएगी। फैमिली कोर्ट के प्रिंसिपल जज सुनील दत्त पांडेय के समक्ष दोनों पक्षों को पेश होना है। यह तीसरी बार है जब अदालत समझौते का रास्ता तलाशेगी।

हाईकोर्ट से लौटकर फिर निचली अदालत में मामला

यह विवाद पहले फैमिली कोर्ट से Patna High Court पहुंचा था। हाई कोर्ट ने ऐश्वर्या की रिव्यू पिटीशन खारिज कर दी। साथ ही मध्यस्थता में सहयोग की सलाह दी। अब मामला फिर फैमिली कोर्ट में सुनवाई के लिए आ गया है।

अब सुलह से ज्यादा कानूनी रणनीति?

दो बार पहले भी मध्यस्थता की कोशिश हो चुकी है। एक बैठक पटना चिड़ियाघर में हुई। दूसरी शहर के एक होटल में, जहां Lalu Prasad Yadav भी मौजूद थे। दोनों प्रयास विफल रहे। सूत्रों के मुताबिक, तेजप्रताप तलाक चाहते हैं। वहीं ऐश्वर्या इसके पक्ष में नहीं हैं। अगर पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं हुए, तो तलाक याचिका खारिज भी हो सकती है।

‘अनुष्का’ एंगल से बढ़ी जटिलता

मामले में ‘अनुष्का’ नाम सामने आने के बाद विवाद और गहरा गया। तेजप्रताप ने सार्वजनिक रूप से ऐसे किसी संबंध से इनकार किया है। कानूनी जानकारों के अनुसार, यदि वैवाहिक संबंध रहते दूसरे रिश्ते साबित होते हैं, तो यह हिंदू विवाह अधिनियम के तहत गंभीर विषय बन सकता है।

गुजारा भत्ता और आवास विवाद

फैमिली कोर्ट पहले ही ऐश्वर्या को अंतरिम गुजारा भत्ता देने का आदेश दे चुका है। आवास को लेकर भी विवाद बना हुआ है। गोला रोड स्थित फ्लैट की पेशकश की गई थी। लेकिन ऐश्वर्या ने उसे अस्वीकार कर एसके पुरी क्षेत्र में सुविधायुक्त आवास और प्रति माह डेढ़ लाख रुपये भत्ता की मांग की है।

राजनीतिक परिवारों का हाई-प्रोफाइल मामला

तेजप्रताप, Rabri Devi और लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे हैं। ऐश्वर्या, पूर्व मुख्यमंत्री Daroga Prasad Rai की पोती हैं। दो प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों से जुड़ा होने के कारण यह मामला लगातार सुर्खियों में है।

2018 की शादी, 2026 की कानूनी लड़ाई

दोनों की शादी 12 मई 2018 को हुई थी। कुछ महीनों बाद ही रिश्तों में तनाव की खबरें आने लगीं। 2019 में विवाद सार्वजनिक हुआ। अब यह मामला तलाक और कानूनी दावों के जटिल चरण में पहुंच चुका है।

कानूनी आधार ही होंगे निर्णायक

विशेषज्ञों का कहना है कि वैवाहिक विवादों का फैसला केवल हिंदू विवाह अधिनियम के प्रावधानों के तहत होता है। मानसिक क्रूरता या अन्य आरोपों को साक्ष्य से सिद्ध करना जरूरी होता है। सिर्फ सार्वजनिक चर्चा या राजनीतिक दबाव से न्यायिक मानक नहीं बदलते। अब नजरें आज की सुनवाई पर हैं। क्या रिश्ते में नरमी आएगी? या फिर कानूनी जंग और तेज होगी? आने वाले फैसले से तस्वीर साफ होगी।

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