संस्थागत ढाल’ से संसद तक: टीएमसी ने राजीव कुमार को राज्यसभा भेजा

ममता बनर्जी और राजीव कुमार की फाइल फोटो
टीएमसी ने पूर्व डीजीपी राजीव कुमार को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया।टीएमसी ने पूर्व डीजीपी राजीव कुमार को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया।

ममता का बड़ा दांव, चार नामों से बदला सियासी समीकरण

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने राज्यसभा चुनाव के लिए चार उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। इस सूची में सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व डीजीपी Rajeev Kumar के नाम की है। 16 मार्च को होने वाले चुनाव में पश्चिम बंगाल से पांच सीटें खाली हो रही हैं। इनमें से चार सीटों पर टीएमसी की जीत लगभग तय मानी जा रही है। राजीव कुमार के अलावा पार्टी ने Babul Supriyo, वरिष्ठ अधिवक्ता Menaka Guruswamy और अभिनेत्री Koel Mallick को उम्मीदवार बनाया है। टीएमसी सूत्रों के मुताबिक, यह फैसला केवल नामांकन नहीं है। बल्कि यह एक सियासी संदेश भी है।

संकट के समय ‘ढाल’ बने राजीव कुमार

राजीव कुमार हाल ही में 31 जनवरी को डीजीपी पद से रिटायर हुए थे। वे मुख्यमंत्री Mamata Banerjee के करीबी अफसर माने जाते हैं। 2013 के शारदा चिटफंड घोटाले में उन्होंने एसटीएफ प्रमुख के तौर पर जांच संभाली। बाद में मामला सीबीआई को सौंपा गया। हालांकि 2019 में जब सीबीआई उनकी जांच के लिए कोलकाता पहुंची, तब ममता बनर्जी धरने पर बैठ गई थीं। यह घटनाक्रम राष्ट्रीय सुर्खियों में रहा। टीएमसी नेताओं का कहना है कि उस दौर में राजीव कुमार सरकार के लिए ‘संस्थागत ढाल’ बनकर खड़े रहे। इसलिए पार्टी ने उन्हें सम्मान दिया है।

अन्य उम्मीदवारों से भी संदेश

बाबुल सुप्रियो पहले केंद्र में मंत्री रह चुके हैं। अब वे टीएमसी के टिकट पर दिल्ली जाएंगे। वहीं मेनका गुरुस्वामी को सेक्शन 377 पर ऐतिहासिक याचिका के लिए जाना जाता है। पार्टी उन्हें संसद में मजबूत कानूनी आवाज मान रही है। दूसरी ओर, कोएल मलिक का नाम फिल्म जगत से जुड़ा है। इससे पहले भी टीएमसी कलाकारों को संसद भेजती रही है।

विपक्ष का तीखा हमला

बीजेपी ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने आरोप लगाया कि टीएमसी गैर-बंगाली चेहरों को तरजीह दे रही है। वहीं सीपीएम नेता सुजन चक्रवर्ती ने भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि यह प्रशासन और राजनीति के खतरनाक मेल का उदाहरण है।

चुनावी गणित और सियासी संदेश

राज्यसभा की ये सीटें 2 अप्रैल को खाली होंगी। टीएमसी के पास पर्याप्त संख्या बल है। इसलिए चार सीटों पर उसकी जीत लगभग तय मानी जा रही है। राजीव कुमार की एंट्री से राज्य की राजनीति में नई हलचल है। साथ ही, यह फैसला नौकरशाही को भी एक स्पष्ट संदेश देता है। cccअब सबकी नजर 16 मार्च के नतीजों पर टिकी है। बंगाल की सियासत एक बार फिर गरमा गई है