नील कात्याल ने दी संवैधानिक चुनौती, गीता गोपीनाथ ने भी जताई आपत्ति
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump के 15 प्रतिशत ग्लोबल टैरिफ फैसले पर बड़ा कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। यह मामला अब संवैधानिक बहस का रूप ले चुका है। भारतीय मूल के अमेरिकी वकील Neal Katyal ने इस कदम को कोर्ट में फिर से चुनौती देने की बात कही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के पास इतने व्यापक टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है।
सेक्शन 122 को लेकर उठे सवाल
कात्याल का तर्क है कि ट्रंप प्रशासन जिस सेक्शन 122 के तहत टैरिफ लगा रहा है, उसकी व्याख्या पहले अलग तरीके से की गई थी। उन्होंने कहा कि अमेरिकी संविधान के अनुसार टैक्स और टैरिफ लगाने का अधिकार कांग्रेस के पास है। ऐसे में राष्ट्रपति को कांग्रेस से मंजूरी लेनी चाहिए। कात्याल ने याद दिलाया कि पहले सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने खुद माना था कि ‘ट्रेड डेफिसिट’ और ‘बैलेंस ऑफ पेमेंट्स’ अलग अवधारणाएं हैं। अब उसी सेक्शन 122 का इस्तेमाल करना विरोधाभासी है।
गीता गोपीनाथ का समर्थन
पूर्व आईएमएफ फर्स्ट डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर Gita Gopinath ने भी कात्याल के तर्क का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि ट्रेड डेफिसिट और बैलेंस ऑफ पेमेंट्स को एक जैसा मानना बुनियादी अंतरराष्ट्रीय अर्थशास्त्र के खिलाफ है। उनके अनुसार, सेक्शन 122 के तहत 150 दिनों के लिए ही टैरिफ लगाया जा सकता है। इसे बार-बार बढ़ाना कानूनी रूप से कमजोर आधार होगा।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नया कदम
इससे पहले Supreme Court of the United States ने 6-3 के फैसले में ट्रंप प्रशासन के पुराने टैरिफ को असंवैधानिक बताया था। कोर्ट ने कहा था कि इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर एक्ट के तहत राष्ट्रपति ने अपनी सीमा से ज्यादा अधिकार का इस्तेमाल किया। इसके बाद ट्रंप ने सेक्शन 122 के तहत पहले 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया। फिर इसे बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया। हालांकि, ट्रंप ने कोर्ट के फैसले की आलोचना की और कहा कि उनकी सरकार कानूनी तरीके से नए टैरिफ लागू करेगी।
भारत समेत कई देशों पर असर
नया टैरिफ ऐसे समय आया है जब अमेरिका और भारत के बीच ट्रेड वार्ता चल रही है। भारत सरकार ने कहा है कि वह नए टैरिफ के प्रभाव का अध्ययन कर रही है। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के अनुसार, भारत सहित कई देश फिलहाल 10 प्रतिशत ग्लोबल टैरिफ के दायरे में रहेंगे।
लंबी कानूनी लड़ाई के संकेत
कात्याल का कहना है कि यह मामला केवल राजनीति का नहीं है। यह संविधान और सत्ता के संतुलन का मुद्दा है। उन्होंने साफ कहा कि अमेरिका में राष्ट्रपति शक्तिशाली हो सकता है। लेकिन संविधान उससे भी अधिक शक्तिशाली है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या यह 15 प्रतिशत टैरिफ कोर्ट में टिक पाएगा या फिर रोल बैक होगा।
