आधी एयरफोर्स की तैनाती का दावा, एक्सपर्ट ने कहा—‘इतिहास में ऐसा कम ही देखा गया’
ईरान को लेकर अमेरिका की सैन्य सक्रियता ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है। मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य जमावड़े को अभूतपूर्व बताया जा रहा है। यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के प्रोफेसर रॉबर्ट ए. पेप ने दावा किया है कि यह अमेरिका की कुल तैनात करने योग्य एयरफोर्स का 40 से 50 प्रतिशत तक हो सकता है। उन्होंने इसकी तुलना 1991 के Operation Desert Storm और 2003 के Iraq War से की है।
आसमान में अमेरिकी ताकत
रिपोर्ट्स के मुताबिक, 30 F-35A स्टील्थ फाइटर जेट्स तैनात किए गए हैं। ये पांचवीं पीढ़ी के अत्याधुनिक लड़ाकू विमान हैं। इसके अलावा 24 से ज्यादा F-15E स्ट्राइक ईगल भी मौजूद हैं। A-10 थंडरबोल्ट और F-16 फाइटर्स भी सक्रिय बताए जा रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के लिए EA-18G ग्राउलर विमान तैनात हैं। इनका काम रडार और कम्युनिकेशन सिस्टम को जाम करना है।
‘न्यूक्लियर स्निफर’ और जासूसी विमान
WC-135R को ‘न्यूक्लियर स्निफर’ कहा जाता है। यह हवा में रेडियोएक्टिव कणों का पता लगाने में सक्षम है। इसके अलावा RC-135 सिग्नल इंटेलिजेंस विमान भी सक्रिय हैं। AWACS (E-3 Sentry) आसमान में उड़ते रडार स्टेशन की तरह काम करते हैं।
लॉजिस्टिक मूवमेंट भी तेज
C-17A और C-5M जैसे भारी मालवाहक विमानों की सैकड़ों उड़ानों की खबर है। इनसे हथियार, गोला-बारूद और सैन्य उपकरण पहुंचाए जा रहे हैं। KC-135 और KC-46 टैंकर विमानों की तैनाती से फाइटर जेट्स को हवा में ही ईंधन मिल रहा है।
समंदर में ‘लोहे का किला’
USS Abraham Lincoln स्ट्राइक ग्रुप अरब सागर में तैनात बताया जा रहा है। इसके साथ विध्वंसक जहाज भी मौजूद हैं। इसके अलावा THAAD और पैट्रियट मिसाइल सिस्टम से सहयोगी देशों की सुरक्षा बढ़ाई गई है।
बढ़ती आशंका
विश्लेषकों का मानना है कि इतनी बड़ी तैनाती केवल शक्ति प्रदर्शन नहीं होती। इतिहास बताता है कि ऐसे सैन्य जमावड़े के बाद बड़े ऑपरेशन देखे गए हैं। हालांकि, अभी तक किसी आधिकारिक हमले की घोषणा नहीं हुई है। लेकिन हालात ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल, दुनिया की नजरें मिडिल ईस्ट पर टिकी हैं। आने वाले दिन क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं।
